झारखंड में लग रही है नौकरियों की बोली – अमित मंडल
भाजपा ने की केवल उत्पाद सिपाही मामले की नहीं बल्कि विगत 3 वर्षों में सभी विवादित परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग
दूसरे राज्यों की ब्लैक लिस्टेड एजेंसियों के लिए झारखंड सरकार द्वारा रेड कारपेट बिछाने का भाजपा ने लगाया आरोप
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल की संयुक्त पीसी
उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले को लेकर भाजपा पूरी तरह आक्रामक है। इस मामले को लेकर पार्टी लोकभवन का दरवाजा तक खटखटा चुकी है। आज इसी मुद्दे पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने संयुक्त पीसी कर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है।
प्रेसवार्ता में विधानसभा में मुख्य सचेतक सह हटिया विधायक नवीन जयसवाल ने कहा कि 12 अप्रैल को हुई उत्पाद सिपाही परीक्षा में पेपर लीक की घटना कोई पहली घटना नहीं है। झामुमो, कांग्रेस और राजद की सरकार में जितने भी एग्जाम हुए हैं, लगभग सभी परीक्षा विवादों में रही है। अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र से परीक्षा देकर घर भी नहीं पहुंचते, वे बस में ही रहते हैं तभी व्हाट्सएप ग्रुप में चलने लगता है कि पेपर लीक हो गया है।
श्री जयसवाल ने कहा है कि इस मामले में पुलिस प्रशासन की हउ़बड़ाहट और जांच का रवैया साफ बतला रहा है कि कहीं न कहीं बड़ा घालमेल है। युवाओं के भविष्य के साथ यह सरकार पहली बार धोखा नहीं कर रही है। हर नौकरी को इस सरकार ने बेचने का काम किया है। सरकार हो, जेएसएससी हो, जेपीएससी हो, सभी लोग इसमें षड्यंत्र में शामिल हैं। मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि अगर आपके मन में कोई छल कपट नहीं है, आप यहां के नौजवानों को निष्पक्ष न्याय दिलाना चाहते हैं तो राज्यपाल के पास हमारी पार्टी ने जो मांग रखी है, आपसे भी यही अनुरोध करते हैं कि आप मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा कीजिए। इससे दूध का दूध पानी का पानी स्पष्ट हो जाएगा। क्योंकि उत्पाद सिपाही के अभ्यर्थी इस पूरे प्रकरण को शंका की नजर से देख रहे हैं।
श्री जयसवाल ने कहा कि 12 अप्रैल को उत्पाद सिपाही की बहाली को लेकर लिखित परीक्षा के एक दिन पहले 179 बच्चे तमाड़ में गिरफ्तार हुए, उनके साथ अतुल वत्स जो इंटरनेशनल गिरोह का सरगना है वह भी गिरफ्तार हुआ। आनन फानन में पुलिस महकमा द्वारा रात में पहुंचकर इस मामले की लीपापोती का प्रयास किया गया। सरकार के दबाव में प्रशासन द्वारा कहा गया कि यह पेपर लीक नहीं है। पुलिस और विभाग की हड़बड़ाहट इसके पीछे के सारे खेल के संबंध में सब कुछ साफ इशारा कर रही है। तमाड़ थाना प्रभारी ही कह रहे हैं कि वहां पर जो तथ्य आए हैं उसके अनुसार जहां पर प्रश्न पत्र प्रिंट होता है वहीं से चुरा करके बच्चों के बीच बांटा गया और उनको रटवाया गया। पुलिस प्रशासन के दोनों चीज में विरोधाभास है। प्रशासन बतलाये कि सुनसान जंगल में 179 बच्चे अलग-अलग क्षेत्र से जो आये थे रात में कौन सी तैयारी कोचिंग सेंटर द्वारा करवाया जा रहा था ? जब कोचिंग सेंटर था तो फिर 180 लोगों को जेल क्यों भेजा गया? सूचना तो यह है कि ऐसे कई बच्चे उस जगह से भागने में भी सफल रहे और जो सूचना प्राप्त हुई की ऑब्जेक्टिव का लगभग प्रश्न लीक था। सरकार स्पष्ट करें कि एग्जाम कंडक्ट कराने के लिए किस एजेंसी को इन्होंने हायर किया था। जो सूचना है कि बिहार में ब्लैकलिस्टेड कंपनी है जिसके ऊपर मामला भी दर्ज है, जांच हो रही है उसी एजेंसी के द्वारा इस पूरे प्रकरण को अंजाम देने का काम किया गया।
श्री जयसवाल ने कहा कि उत्पाद सिपाही का जो एग्जाम हुआ। उसमें पहले फिजिकल टेस्ट हुआ, जिसमें लाखों बच्चे भाग लिये थे और कई बच्चों की जान भी चली गई थी। इस तरह का एग्जाम पहले रिटन होना चाहिए था उसके बाद फिजिकल टेस्ट होना चाहिए था लेकिन नौकरी की बेचने की मंशा से पर्दे के पीछे से कुछ सफेदपोश के इशारे पर पहले फिजिकल टेस्ट कराया गया ताकि फिजिकल टेस्ट में क्वालीफाई बच्चों से संपर्क कर पैसों का खेल खेलकर नौकरियां बेची जाय।
श्री जयसवाल ने कहा कि एक केंद्र में इतने बच्चों का पकड़ा जाना दर्शाता है कि बड़ी गड़बड़ी हुई है। जब रिजल्ट आएगा तो किस पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं, सब सामने आ जायेगा। इसलिए झारखंड के युवाओं के भविष्य को साकार करने और उनके साथ अन्याय नहीं हो, सीबीआई जांच आवश्यक है।
प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि केवल जेएसएससी उत्पाद परीक्षा पेपर लीक मामले की नहीं बल्कि विगत 3 वर्षों में जो भी विवादित परीक्षाएं हुई हैं चाहे वह जेपीएससी की हो या जेएसएससी के द्वारा आयोजित हो, सभी की सीबीआई जांच की मांग हमारी पार्टी करती है। क्योंकि ना हमें सीआईडी पर यकीन है ना राज्य की किसी अन्य एजेंसी पर। सीबीआई जांच में दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जायेगा। राज्य सरकार अगर युवाओं का हित चाहती है और निष्पक्ष परीक्षा की पक्षधर है तो उसे बिना विलम्ब किये सीबीआई जांच की अनुशंसा कर केंद्र सरकार को भेजनी चाहिए।
श्री मंडल ने कहा कि जेएसएससी उत्पाद परीक्षा लेने वाली एजेंसी कौन है, सरकार को यह बताना चाहिए। सरकार यह भी बतलाए कि एक नई एजेंसी जिसका रजिस्ट्रेशन 2026 में होता है इतने बड़े एग्जाम का जिम्मा उसे कैसे मिल जाता है ? क्या उक्त एजेंसी ने झारखंड के अलावा भी कहीं एग्जाम कंडक्ट किया है ? क्या इस एजेंसी की वहां पर पेपर लीक में संलिप्तता दिख रही है ? जहां तक जानकारी है कि इस एजेंसी ने बिहार शिक्षा भर्ती tre 3 का भी एग्जाम लिया था वहां उसे ब्लैक लिस्टेड किया गया है। विडंबना यह है कि ऐसे ब्लैक लिस्टेड कंपनी के लिए झारखंड सरकार रेड कारपेट बिछाए बैठीे है। राज्य सरकार को जब लगता है कि उसकी चोरी पकड़ी गई तो वह नाम मात्र के लिए कुछ कार्रवाई कर देती है। इसी प्रकार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा लेने वाली एजेंसी भी बिहार और उड़ीसा में ब्लैक लिस्टेड रही है। झारखंड में भी बीजेपी के विरोध के बाद वह ब्लैक लिस्टेड हुई। सरकार को बतानी चाहिए कि उसकी निविदा प्रक्रिया और उसका चयन का आधार क्या रहा है ? ऐसे विवादित एजेंसियों से राज्य सरकार का अगाढ़ प्रेम दर्शाता है कि झारखंड में नौकरियों की बोली लगाई जा रही है।
श्री मंडल ने कहा कि एक और दिलचस्प बात कि उत्पाद सिपाही परीक्षा मामले में पुलिस ही सूचक है और पुलिस ही गवाह भी। हाई कोर्ट ने भी पुलिस के इस रवैये पर फटकार लगाया है। इस मामले में कहीं ना कहीं पुलिस और राज्य सरकार सच को छुपाना चाहती है। सिपाही परीक्षा मामले में व्यापक पैमाने पर सीटों का बंदरबांट हुआ है। युवाओं के साथ यह खिलवाड़ है। भाजपा मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगी। हमारी पार्टी निष्पक्षता की पक्षधर है। इस मामले के मुख्य सरगना को सामने लाने की जरूरत है। विवादित और कमजोर एजेंसी के पीछे कौन-कौन सफेदपोश लोग शामिल हैं। कौन लोग सीटों को बेचकर युवाओं को भविष्य चौपट करने की दुकानदारी चला रहे हैं। राज्य सरकार को तमाम चीजों का खुलासा करना चाहिए। राज्य सरकार अगर पार्टी की मांगों पर विचार नहीं करती है तो सड़क से सदन तक आंदोलन किया जायेगा।
इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

