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सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को जगी न्याय की उम्मीद : आदित्य साहू

अब हेमंत सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर वह CBI जांच से क्यों भाग रही?

राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने मिलकर राज्य के छात्रों की पीठ में छुरा घोंपा

भाजपा की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट में सारे मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा और सभी छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस करने का लिया जाएगा फैसला

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि JPSC-JSSC नियुक्ति महाघोटाले की CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेमंत सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाना छात्रों के संघर्ष में एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने सीबीआई जांच की दिशा में इसे बढ़ता हुआ पहला कदम बताया है। सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को न्याय की उम्मीद जगी है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियां न्याय का अंतिम दरवाजा नहीं है। छात्रों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है। झारखंड में JSSC और JPSC के माध्यम से नौकरी बेचे जाने और युवाओं के साथ हुए धोखे की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट की यह टिप्पणी कि मामले में सक्षम एजेंसी से जांच की आवश्यकता हो सकती है, बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अब झारखंड सरकार की सारी काली करतूतों का सच सामने आकर रहेगा और झारखंड के लाखों युवाओं को उनका अधिकार मिलकर रहेगा। कहा कि अब हेमंत सरकार को बहानेबाजी और पैंतरेबाज़ी छोड़ जवाब देना होगा कि आखिर वह CBI जांच से क्यों भाग रही है? सरकार के द्वारा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बचाने की कोशिश क्यों हो रही है?

श्री साहू ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों के साथ जो सलूक किया है, क्रूरता की है, उससे राज्य पूरे देश में शर्मसार हुआ है। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने मिलकर राज्य के अबोध बच्चों के साथ छल एवं साजिश करने का काम किया है और पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। छात्रों को पहले पुलिस से पिटवाया, बाद में सरकार ने अपनी पार्टी के गुंडों से पिटवाया। फिर फर्जी मुकदमों का खेल खेला। सोशल मीडिया सहित उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रतिबंधित किया। हेमंत सरकार पूरी तरह हिटलरशाही पर उतर आई है। सरकार की सारी करतूत काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। राहुल गांधी और कांग्रेस ने भी छात्रहित का ढोंग किया है। सीआईडी जांच के नाम पर केवल आईवॉश की जा रही है। यह मुख्य सरगना और बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद के सिवाय कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह जनविरोधी सरकार जितना जुल्म करना है, कर ले। हमारी पार्टी की सरकार 2029 में राज्य में बननी तय है। जिस दिन सरकार बनी, पहली ही कैबिनेट में सारे मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा और सभी छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस करने का फैसला लिया जाएगा। भाजपा छात्रों के साथ सदैव खड़ी है और जब तक दोषियों का चेहरा बेनकाब नहीं होता और युवाओं को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।

छात्रों की आवाज को लाठी-डंडों से दबाने की कोशिश लोकतंत्र पर हमला, इस गुंडागर्दी का मिलेगा मुँहतोड़ जवाब : बाबूलाल मरांडी

छात्रों पर हो रहे जुल्मो सितम पर राहुल गांधी की चुप्पी पर भी उठाए सवाल

बच्चे नादान और अबोध, इसलिए सरकार एवं हेमंत सोरेन की साजिश को नहीं समझ पाए और वह उनके झांसे में आ गए

लोकतंत्र में सभी को आंदोलन का हक, संवैधानिक अधिकार को कुचलने की गुंडागर्दी को भाजपा नहीं करेगी बर्दाश्त

jmm के नेता पटक-पटककर मारने की बात कर रहे, यह भला कैसा लोकतंत्र है? झामुमो पूरी तरह गुंडागर्दी पर उतर आई है।

सरकार और प्रशासन से इस मामले में सभी दोषियों को चिह्नित करते हुए उनपर मुकदमा दर्ज कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झामुमो कार्यकर्ताओं के द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों के साथ की गई गुंडागर्दी को निंदनीय और शर्मनाक बतलाया है। कहा कि बीजेपी इस घटना का पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में हेमंत सोरेन ने नीचता की सारी हदें पार कर दी हैं। छात्रों की आवाज़ को लाठी-डंडों से दबाने की यह कोशिश लोकतंत्र पर हमला है। इस गुंडागर्दी का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। श्री मरांडी गिरिडीह में प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि गिरिडीह के झंडा मैदान में छात्रों को झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, हजारीबाग, रांची सहित अन्य जगहों में भी इसी तरह की गुंडागर्दी दिखी। लाठी डंडे से लैस झामुमो के गुंडे आतंक मचाते दिखे। रांची में तो बच्ची तक को नहीं छोड़ा गया। रामगढ़ में jmm के नेता खुलेआम कहते हैं कि जो लोग भी सीएम का पुतला दहन करेगा उसको पटक-पटककर मारेंगे। सभी जगहों की गुंडागर्दी की वीडियो फुटेज है, कौन लोग लाठी झंडा लेकर छात्रों को पीट रहे हैं। यह भला कैसा लोकतंत्र है? अब झामुमो पूरी तरह गुंडागर्दी पर उतर आई है। भारतीय जनता पार्टी इस कृत्य का विरोध करती है। अगर जरूरत पड़ी तो हमारी पार्टी सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

श्री मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को लोकतांत्रिक रूप से आंदोलन करने का हक है। अपने हक अधिकार के लिए लोग आंदोलन करेंगे, सड़क पर निकलेंगे, पुतला दहन करेंगे, जिंदाबाद मुर्दाबाद भी करेंगे। अगर कोई गुंडागर्दी के बलबूते इस संवैधानिक अधिकार को कुचलने का काम करेगा तो बीजेपी बर्दाश्त नहीं करेगी।

श्री मरांडी ने कहा कि 21 अगस्त को छात्रों के साथ मारपीट की घटना अचानक नहीं हुई। इसकी पटकथा हेमंत सोरेन ने 18 अगस्त को ही इससे जुड़े अपने तुगलगी कैबिनेट निर्णय के साथ लिख दिया था। छात्र 25 दिन से लगातार आंदोलनरत थे। 10 अगस्त को छात्र विधानसभा मार्च करके सरकार की सारी चुनौतियों को पार कर अपनी फौलादी एकता और जज्बे का एहसास कराते हुए विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। चाहते तो वे गेट के अंदर भी जा सकते थे लेकिन यहां के बच्चे अनुशासित हैं। उस दिन बच्चों को रात के अंधेरे में भी पीटा गया। फिर बच्चे पुनः धरना स्तर पर आ गए।

श्री मरांडी ने कहा कि जब-जब छात्रों ने अपने आंदोलन को गति देने के लिए कार्यक्रमों की घोषणा की, तब तब सरकार ने वार्ता के नाम पर दिखावा किया। जब छात्र ने 20 अगस्त की डेडलाइन तय कर समस्या का समाधान नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास घेरने का निर्णय लिया तो सरकार ने पहली प्राथमिकता तय किया कि सबसे पहले बच्चों को धरना स्थल से हटाया जाए। और फिर कैबिनेट मीटिंग के नाम पर साजिश किया गया। बच्चे नादान और अबोध होते हैं इसलिए सरकार और हेमंत सोरेन की साजिश को नहीं समझ पाए और वह उनके झांसे में आ गए। राज्य सरकार की मंशा और नीयत प्रारंभ से ही छात्र आंदोलन को लेकर साफ नहीं रही है, यह लगातार साजिश पर साजिश कर रही थी। इसलिए राज्य सरकार ने जिस दिन कैबिनेट से परीक्षा रद्द करने सहित अन्य निर्णय लिया था उसी दिन हमने आशंका जताते हुए बतला दिया था कि इस निर्णय का क्या हश्र होने वाला है।

श्री मरांडी ने राहुल गांधी को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वे तो अपने आप को शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्षधर बताते रहे हैं फिर झारखंड में अपनी सरकार के लोगों की इस गुंडागर्दी पर वे क्यों चुप हैं ? क्यों छात्रों पर हो रहे इस जुल्मो सितम की गूंज उनके कानों तक नहीं पहुंच पा रही?

श्री मरांडी ने कहा कि सारी गलती राज्य सरकार और झामुमो की है। हाई कोर्ट से जब स्टे मिला तो बच्चों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी जिलों में पुतला दहन कार्यक्रम की घोषणा की थी, इसलिए यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक था। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच ही इस मामले का एकमात्र विकल्प है। जो दोषी होंगे वह पकड़े जाएंगे और जो निर्दोष होंगे वह बरी होंगे।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड के छात्रों पर हमला अचानक नहीं था, बल्कि इसके पीछे पहले से तैयारी थी? इस बात की पुष्टि इससे जुड़े सामने आए गिरिडीह के महेशमुंडा के इमरान नामक युवक के WhatsApp ग्रुप के मैसेज ने झामुमो के गुंडों की पोल खोल दी है। मैसेज में साफ लिखा है कि ’04 बजे पार्टी कार्यालय गिरिडीह पहुँचें। संगठन का इमरजेंसी कॉल है।’ इसके बाद JMM से जुड़े लोगों का वीडियो भी सामने आता है।

श्री मरांडी ने कहा कि इस शख्स की तत्काल गिरफ्तारी हो और प्रशासन पूछताछ करे कि झामुमो का यह इमरजेंसी कॉल किसलिए था? किसे बुलाया गया था? किसके निर्देश पर भीड़ जुटाई गई? और क्या इसी भीड़ का इस्तेमाल छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ किया गया? उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है कि अगर छात्रों पर हमला करने की कोई योजना नहीं थी, तो फिर पार्टी कार्यालय से ऐसा इमरजेंसी मैसेज क्यों जारी हुआ? साथ ही रामगढ़ के झामुमो नेता पर मुकदमा दर्ज करने सहित सभी जगहों पर गुंडागर्दी करने वाले लोगों की शिनाख्त कर उनपर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस मामले में सभी दोषियों को चिह्नित करते हुए उनपर मुकदमा दर्ज कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

इस दौरान प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष रंजीत राय, प्रदेश मंत्री दिलीप वर्मा, कार्यसमिति सदस्य चुन्नूकांत सहित कई नेता कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हेमन्त सोरेन की सरकार ने आपातकाल के मंजर की दिला दी याद : संजय सेठ

झारखंड सरकार ने 1000 करोड़ रुपया में बच्चों के भविष्य को बेचा

उतर प्रदेश और बिहार में टीडीपीएल और बिनसिस कंपनी ब्लैकलिस्टेड हुई और झारखंड में सेलेक्ट हुई

जेपीएससी की पूर्व चेयरपर्सन नीलिमा केरकेट्टा के द्वारा सीएम को लिखी चिठ्ठी को क्यों दबाया गया

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने राज्य भर में छात्रों पर झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा हुए हमले एवं बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की भर्त्सना करते हुए झारखंड में पिछले 6 वर्षों में जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल सहित सभी आयोजित भर्ती परीक्षा की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में श्री सेठ ने कहा कि जिस प्रकार से निर्दोष छात्रों पर रांची, हज़ारीबाग़, गिरिडीह, गढ़वा में झामुमो के गुंडों के द्वारा मारपीट, छेड़छाड़ और पुलिस के द्वारा लाठियां बरसाई गयी। उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। बच्चे जब इलाज के लिए अस्पताल गए तो वहां भी छात्रों को पीटा गया और वहां से भगाया गया। अस्पताल के निदेशक और सिविल सर्जन पर घायल छात्रों को बिना इलाज के ही छोड़ देने का दबाव बनाया गया। हमने ऐसा मंजर आपातकाल के समय ही देखा था जिसे कल हेमन्त सोरेन की सरकार ने याद दिला दी।

श्री सेठ ने कहा कि हेमन्त जी ये कोई बाहर के बच्चे नहीं है हमारे और आपके बच्चे हैं। वे बेचारे संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से बिना उपद्रव, बिना किसी के मुर्दाबाद, बिना किसी की आजादी की मांग और बिना किसी सार्वजनिक सम्पति की नुकसान किये, किसी पर ढेला पत्थर फेंके बिना पिछले 25 दिनों से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आपसे गुहार करते रहे और आमरण अनशन पर रहे। लेकिन आपने उनकी एक न सुनी। जब पूरे देश में इस आंदोलन को समर्थन मिलने लगा तो आपकी सरकार ने फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाते हुए छात्रों को धोखा दिया। एक षड्यंत्र के तहत आपने परीक्षा को रद्द किया लेकिन उसके बचाव में कोर्ट में दलील देने हेतु राज्य के महाधिवक्ता को कोर्ट नहीं भेजकर एक जूनियर वकील को भेज दिया। आपकी इस चाल को राज्य की जनता भलीभांति समझ चुकी है।

श्री सेठ ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि झारखंड में खून बहा है, यहां भी छात्रों के हाथ पैर टूटे है, लेकिन आपके मुंह से उफ तक न निकला। उन्होंने राहुल गांधी को मौकापरस्त बतलाते हुए कहा कि आपको छात्र आंदोलन से केवल राजनीतिक लाभ लेना है। इसलिये आप दिल्ली तो गए लेकिन झारखंड जहां आपकी सरकार है वहां आप नहीं आये। आप अगर इतने ही छात्र हितैषी हैं तो राँची आकर झारखंड के छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े होइये और हेमन्त सोरेन सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कीजिए। अन्यथा तत्काल अपना समर्थन वापस लीजिए। लेकिन आप ऐसा नहीं करेंगे, आपके दोहरे चरित्र से पूरा देश वाकिफ हो चुका है। इसलिये आपको और आपकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है।

पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के पत्र का क्या हुआ

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने पूछा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेटा के द्वारा 2024 में सरकार को जेपीएससी में व्याप्त घोटाले एवं खामियों को लेकर जो पत्र लिखकर आगाह किया गया था, सरकार उस पत्र को क्यों दबा कर बैठी हुई है। सरकार की क्या मजबूरी है और किसका दबाव है। नीलिमा केरकेट्टा के पत्र का सच झारखंड की जनता जानना चाहती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान जेपीएससी में पूर्व मंत्री, मुख्यमंत्री और झामुमो के महासचिव की रिश्तेदार सदस्य रह चुकी हैं। कहीं सरकार इन्हें बचाने की कोशिश तो नहीं कर रही है। आखिर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने पर क्या आपत्ति है या डर क्यों हैं। सीआईडी की जांच पर यहां के बच्चों को भरोसा नहीं है। बिनसिस के निदेशक अरुण कुमार पर 2022 में नौकरी बेचने का आरोप लगा और सीआईडी जांच में उनके खिलाफ सबूत भी पाए गए लेकिन सीआईडी के द्वारा अरुण कुमार पर चार सालों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिर कैसे यहां के बच्चे सीआईडी जांच पर भरोसा करें।

श्री सेठ ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में नौकरी को बेच कर सत्ता में शामिल लोगों ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को झारखंड से बाहर पटना और नेपाल ले जाकर प्रश्नों के उत्तर रटवाये गए थे। इसकी जांच पूर्ण रूप से सीबीआई ही कर सकती है, सीआईडी नहीं। सीआईडी की जांच पर यहां के बच्चों को भरोसा नहीं है।

आज की प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और मीडिया सह प्रभारी सतीश सिन्हा उपस्थित रहे।

छात्रों के साथ अन्याय कर अपनी पीठ थपथपा रही है सरकार: संदीप वर्मा

छात्र हित में तत्काल JPSC का पुनर्गठन करे सरकार

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने कहा कि झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग की कथित लापरवाही एवं भ्रष्टाचार का खामियाजा आज हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार छात्रों को न्याय देने के बजाय उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।

श्री वर्मा ने कहा कि शुरुआत में सरकार लगातार यह दावा करती रही कि परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आयोजित हुई हैं। लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन और दबाव के बाद JPSC में इस्तीफों और कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। विधानसभा घेराव के बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी सहित कई घटनाओं ने सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राज्य सरकार छात्रों की हितकर कभी नहीं रही है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और नियुक्तियों में भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्य सामने आए हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन तथ्यों को पहले क्यों छुपाया गया। जब अभ्यर्थी लगातार सरकार और आयोग का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे, तब समय रहते नियुक्तियों पर रोक लगाकर निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई?

उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC द्वारा आयोजित लगभग 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। सरकार को यह बताना चाहिए। जिन परीक्षाओं को रद्द किया गया है, उनका दोबारा आयोजन कब तक किया जाएगा? जब छात्र लगातार अनियमितताओं की शिकायत कर रहे थे, तब सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

उन्होंने कहा कि वर्तमान में JPSC पूरी तरह क्रियाशील नहीं है। ऐसे में लंबित और रद्द परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन कैसे होगा, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए अविलंब JPSC का पुनर्गठन किया जाए और लंबित परीक्षाओं के लिए स्पष्ट परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।

श्री वर्मा ने कहा कि सरकार की शिक्षा और रोजगार के प्रति गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। 13 सदस्यों की नियुक्ति नहीं होना और सचिव का पदस्थापन नहीं किया जाना भी सरकार की उदासीनता को दर्शाता है, जिसका सीधा असर राज्य के हजारों विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों से जुड़े सभी मामलों पर संवेदनशीलता के साथ तत्काल निर्णय लेना चाहिए। JPSC-JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए CBI जांच की अनुशंसा की जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो।

राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने साजिश के तहत छात्र आंदोलन को समाप्त करने के लिए परीक्षा रद्द करने का रचा ढोंग : बाबूलाल मरांडी

यह तो होना ही था, दो दिन पहले ही दिन व्यक्त कर दी थी हमने आशंका

छात्रों के प्रति सरकार की नीयत प्रारंभ से ही ठीक नहीं

न्यायालय के फ़ैसले पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बयान

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी, फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक को लेकर हेमंत सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है।

श्री मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह आशंका हमने पहले ही दिन व्यक्त कर दी थी कि छात्रों के प्रति सरकार की नीयत ठीक नहीं है। जिस तरीके से सरकार बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए, तुगलकी फरमान जारी कर एक झटके में JPSC-JSSC की नियुक्तियों और परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर रही थी, हमने उसी समय कहा था कि यह फैसला हाईकोर्ट में टिक नहीं पाएगा और इस पर स्थगन आदेश आ सकता है।

श्री मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत छात्र आंदोलन को समाप्त करने के लिए परीक्षा रद्द करने का ढोंग रचा। सरकार ने छात्रों को कानूनी विशेषज्ञों के साथ वार्ता के लिए बुलाया और बातचीत का भरोसा दिया, लेकिन उसके बाद खुद ही पीछे हट गई और बंद कमरे में परीक्षाओं को रद्द करने का फरमान जारी कर दिया।

श्री मरांडी ने कहा कि हमने सरकार से कैविएट दाखिल करने का आग्रह भी किया था, ताकि न्यायालय में मामला जाने पर स्टे लगने से पहले सरकार अपना पक्ष रख सके। लेकिन कहावत है…चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से न जाए। मुख्यमंत्री ने आखिरकार मेरी आशंका को सही साबित कर दिया। सरकार ने छात्रों को भ्रम में रखकर आंदोलन समाप्त कराया। राजनीतिक साजिश की अज्ञानता में छात्र भी इस चाल का शिकार हो गए।

श्री मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार की मंशा शुरू से ही संदिग्ध रही है। ऐसा लगता है कि सरकार गलत तरीके से बहाल हुए लोगों और उन्हें गलत तरीके से बहाल करने में शामिल जिम्मेदार लोगों को बचाना चाहती है। इसलिए हमारी मांग प्रारम्भ से ही CBI जांच की ही रही है, ताकि गलत तरीके से बहाल किए गए लोगों और उन्हें गलत तरीके से बहाल करने वाले दोषियों की पहचान हो सके और उन्हें सजा मिले। साथ ही, जो अभ्यर्थी पूरी पारदर्शिता और सही प्रक्रिया के तहत चयनित हुए हैं, उन्हें किसी भी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

MMDR अधिनियम पर JMM सहित विपक्षी पार्टियां भ्रम न फैलाएं : आदित्य साहू

आदिवासी, दलित और पिछड़ों पर इस अधिनियम का असर पड़ने वाला मुख्यमंत्री का बयान पूरी तरह भ्रामक

प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान:- भाजपा MMDR अधिनियम को लेकर चलाएगी जागरूकता अभियान, लोगों के बीच बांटेगी प्रतियां

JMM आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की धमकी देकर राज्य में रोकना चाहती है विकास की रफ्तार

झारखंड सरकार और झामुमो अधिनियम पर भ्रम फैलाने की बजाय खनिजों के अवैध खनन और राज्य के विकास पर खपत करे अपनी ऊर्जा

MMDR अधिनियम का उद्देश्य राज्य का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता, निवेश और विकास को गति देना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने JMM सहित विपक्षी पार्टियों द्वारा खनिज संशोधन अधिनियम की खिलाफत को केवल राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाये जा रहे MMDR अधिनियम का उद्देश्य राज्य का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता, निवेश और विकास को गति देना है। यह अधिनियम देश के खनन क्षेत्र को अधिक कुशल, अनुकूल निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से लाया गया है। यह संशोधन केवल झारखंड के लिए नहीं है बल्कि पूरे देश के संदर्भ में किया गया है।

श्री साहू ने कहा कि JMM आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की धमकी देकर राज्य में विकास की रफ्तार रोकना चाहती है। केंद्र की जनहितकारी नीतियों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय JMM को विकास, पारदर्शिता और रोजगार के मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। झारखंड की जनता अब इस राजनीति को पूरी समझ चुकी है। झारखंड सरकार और झामुमो जितनी ऊर्जा एवं ताकत इस अधिनियम पर राज्य वासियों को भ्रमित करने पर खपत कर रही है उतनी ऊर्जा खनिजों के अवैध खनन और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने में लगाती तो राज्य का कायाकल्प हो जाता।

आदित्य साहू ने कहा कि खनिज संशोधन अधिनियम को लेकर झामुमो सहित विपक्ष की सारी आशंकाएं एवं आरोप, बेबुनियाद और निराधार हैं। अधिनियम का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना कतई नहीं है। अधिनियम को लेकर झारखंड सरकार और विपक्ष का आरोप कि राज्यों का खनिज राजस्व छिन जाएगा, पूरी तरह निराधार है। राज्यों को खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा, लेकिन कोई भी राज्य मनमाने ढंग से लगातार बढ़ते उपकर के जरिए पूरे खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म नहीं कर सकता। रॉयल्टी, डीएमएफ़, नीलामी प्रीमियम, एनएमईटी और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी यथावत रहेगी तथा खनन क्षेत्र से होने वाले भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों को प्राप्त होता रहेगा। लघु खनिजों पर राज्यों का नियंत्रण पूर्ववत रहेगा। बालू, गिट्टी और साधारण मिट्टी जैसे लघु खनिजों पर राज्य की वर्तमान शक्तियों पर इस अधिनियम का कोई प्रभाव नहीं होगा।

श्री साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासी, दलित और पिछड़ों पर इस अधिनियम का असर पड़ने वाला बयान भ्रामक है। खनिज संपदा का पूरा लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों और गरीबों तक पहुंचाना भाजपा और नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है। भाजपा का मानना है कि राज्य की खनिज संपदा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और खनन प्रभावित क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास तेज हो। मुख्यमंत्री को इस पर राजनीति करने की बजाय, अपने कार्यकाल में उनके लिए किए गए विकास कार्यों का हिसाब देना चाहिए। भाजपा चाहती है कि खनन से मिलने वाले राजस्व का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग आदिवासी, दलित, गरीब, पिछड़े और विस्थापित परिवारों के विकास में हो। परंतु राज्य सरकार इसमें फिसड्डी साबित हुई है। सारंडा का पिछड़ापन इसका बड़ा उदाहरण है। वहीं श्री साहू ने झारखंड के साथ भेदभाव को भी गलत बताया। कहा कि केंद्र अगर झारखंड के प्रति संवेदनशील नहीं है तो राज्य को लगातार केंद्रीय योजनाओं और संसाधनों का लाभ कैसे मिल रहा है, मुख्यमंत्री को बताना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते हैं। साल 2014-15 में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी महज 60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 88 प्रतिशत प्लस हो गई। वहीं पिछले 10 साल यानि 2014-15 से 2024-25 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व करीब 354 प्रतिशत बढ़कर 25,206 करोड़ रुपए से 1,14,549 करोड़ रूपया हुआ है। इन आंकड़ों से जनता खुद विचार करेगी कि केंद्र राज्यों का खनिज राजस्व छीन रहा है, यह आरोप विपक्षियों द्वारा बेवजह और झूठा नहीं तो क्या है ?

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने लौह अयस्क पर 600 रुपए प्रति टन का फ्लैट उपकर लगा दिया, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 22.50 प्रति टन है। कोयले पर भी राज्य सरकार ने डेढ़ साल से भी कम समय में उपकर 100 रुपए से बढ़ाकर 450 रुपए प्रति टन कर दिया। इस दौरान बीसीसीएल का 2025-26 का उत्पादन 40.50 मिलियन टन से घटकर 35.52 मिलियन टन हो गया। यानी उत्पादन में 12.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। ऐसा नहीं है कि अधिकतम कर लगाकर अधिकतम राजस्व हासिल किया जा सकता है। सेस के कारण झारखंड को नुकसान हुआ है। अधिकतम कर लगाने से राज्य के अवैध माफियाओं की चांदी है। बीसीसीएल में कोयला चोरी को राज्य सरकार नियंत्रित नहीं कर पाई, केंद्र सरकार को फोर्स भेजना पड़ा।

श्री साहू ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करना चाहती है कि झारखंड के खनिज संसाधनों पर पहला अधिकार झारखंड की जनता के विकास का है, लुटेरों और माफियाओं का नहीं। भाजपा हर मंच पर अधिनियम के तथ्यों को जनता के सामने रखेगी और जागरूकता अभियान चलाकर JMM के झूठ एवं भ्रम का जवाब देगी। साथ ही इस अधिनियम की प्रतियां भी वितरित की जाएगी।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड सरकार की नीयत साफ होती तो झूठा राग अलापने की बजाय वह खदानें चालू करती। कितनी शर्मनाक बात है कि देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज भंडार रखने वाला यह राज्य अपनी अकूत खनिज संपदा का अपेक्षित उपयोग तक नहीं कर पा रहा है। पिछले 6 वर्षों में यहां केवल 4 खदानों की नीलामी हुई। आश्चर्यजनक बात है कि इसमें एक भी संचालन में नहीं आ सकी। वहीं पड़ोसी राज्य ओडिशा ने 35 खदानें चालू कर करीब 87,000 करोड़ रुपए का नीलामी प्रीमियम प्राप्त किया। जबकि झारखंड को नीलामी प्रीमियम से शून्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली jmm की हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले 7 साल में इनका ही दोहन करने का काम किया है। खनिज संपदाओं को तो इस सरकार ने लूटकर और लुटवाकर राज्य को खोखला कर दिया है। इसलिए JMM का इसके खिलाफ आंदोलन केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद है। JMM को झारखंड की जनता को गुमराह करने के बजाय यह बताना चाहिए कि राज्य में वर्षों से चल रहे अवैध खनन, खनिजों की लूट और राजस्व के नुकसान पर उसकी सरकार ने क्या कार्रवाई की?

श्री साहू ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासी कल्याण, मंईया सम्मान योजना, अबुआ आवास के नाम पर भ्रम फैलाने, केंद्र पर दोषारोपण करने की बजाय राज्य सरकार को अपने डीएमएफ़टी फंड के इस्तेमाल का हिसाब देना चाहिए। DMFT फंड की बंदरबांट कैसे की गई है, यह किसी से छुपा नहीं है। बालू और पत्थर खदानों के नीलामी न होने से राज्य को लगातार खनन राजस्व का नुकसान हो रहा है।

कैबिनेट-लेटर का खेल बंद करे सरकार, छात्रों की सभी मांगें अविलंब माने : प्रतुल शाहदेव

भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जेपीएससी अभ्यर्थियों के 24 दिनों से चल रहे आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री द्वारा कैबिनेट की बैठक बुलाना महज आईवॉश है।सरकार अब कैबिनेट और पत्रों की औपचारिकता का खेल बंद करे और छात्रों की सभी मांगों पर तत्काल निर्णायक कार्रवाई करे। प्रतुल ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों को दोपहर 2:00 बजे का टाइम दिया गया। उनको गाड़ियों में भी बैठा लिया गया। लंबे इंतजार के बाद गाड़ी से उतार कर कहा गया की वार्ता के समय में परिवर्तन होगा। ऐसा लगता है सरकार छात्रों के धैर्य की परीक्षा लेने पर उतारू है।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह छात्रों का आंदोलन है और उनकी आवाज किसी राजनीतिक दल की मोहताज नहीं है। हजारों युवा अपने भविष्य के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेने की भी एक सीमा होती है।उन्होंने कहा कि जब छात्र बारिश, उमस और प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार आंदोलन कर रहे थे, तब सरकार ने उनकी पीड़ा को गंभीरता से क्यों नहीं लिया?क्या सरकार को 24 दिन तक छात्रों की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी? क्या मुख्यमंत्री को छात्रों से संवाद करने के लिए किसी पत्र, किसी नेता या किसी राजनीतिक दबाव का इंतजार था?

प्रतुल ने कहा कि अब केवल कैबिनेट की बैठक बुला कर खानापूर्ति कर आधे अधूरे निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है।यह छात्रों के साथ एक और छलावा है। सरकार को स्पष्ट रूप से छात्रों की सभी जायज मांगों को स्वीकार करना होगा और उनके क्रियान्वयन की समयसीमा भी सार्वजनिक करनी होगी।उन्होंने कहा कि छात्रों को लॉलीपॉप नहीं, न्याय चाहिए; आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए; बैठक नहीं, समाधान चाहिए। सरकार यह न भूले कि जिन युवाओं के हाथ में कल झारखंड का भविष्य होगा, आज वही युवा सरकार के दरवाजे पर न्याय मांग रहे हैं।प्रतुल ने कहा कि कैबिनेट की बैठक को राजनीतिक मैनेजमेंट का माध्यम न बनाएं सरकार।

राज्यपाल से मिले प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, राज्य में उपजे हालात से कराया अवगत

झारखंड भाजपा के तीन प्रमुख नेताओं ने लोकभवन जाकर महामहिम राज्यपाल से मुलाकात की है। राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बीच यह मुलाकात काफी अहम है। मुलाकात करने वाले नेताओं में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल हैं। भाजपा नेताओं ने इस दौरान राज्यपाल से छात्र आंदोलन से उपजे हालात सहित प्रदेश के अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की। भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य भर के छात्र पिछले 24 दिनों से रांची में न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, कई छात्र आमरण अनशन के कारण गंभीरावस्था में अस्पताल में इलाजरत भी हैं लेकिन सरकार इनकी मांगों को लगातार अनसुना कर रही है। वार्ता के नाम पर छात्रों को गुमराह किया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप कर इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। ताकि छात्रों की जायज मांगों पर सरकार तत्काल विचार कर उसका कोई ठोस समाधान निकाले। इधर राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि तमाम परिस्थितियों पर उनकी पैनी नजर है।

अटल बिहारी वाजपेई को जाता है झारखंड निर्माण का श्रेय : बाबूलाल मरांडी

देश के लिए उन्होंने किया अपना सर्वस्व न्योछावर

अटल बिहारी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण के लिए समर्पित : कर्मवीर सिंह

पुण्यतिथि पर अटल बिहारी वाजपेई को भाजपा नेताओं ने किया नमन, उनके मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया

झारखंड निर्माता, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर विधानसभा परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। भाजपा नेताओं द्वारा देशहित में उनके विशिष्ट योगदान को याद करते हुए उनके मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया गया।

मौके पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु रहे हैं। क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष, सभी उनका सम्मान करते थे। सभी उनकी राजनीतिक कार्यशैली और विनम्रता के कायल थे। अटल बिहारी ने अपनी सत्ता की परवाह किए बिना पोखरण परमाणु परीक्षण कर दुनिया को भारत की शक्ति का लोहा मनवाया। उनका एक ही उद्देश्य था कि राष्ट्र, शक्तिशाली और समृद्धशाली हो। उन्होंने भारत की सेवा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

श्री मरांडी ने कहा कि जब भी झारखंड की चर्चा होती है, अटल जी का नाम स्वत: पूरे झारखंडवासियों के स्मृति पटल पर उभर आता है। झारखंड निर्माण का श्रेय सिर्फ अटल बिहारी वाजपेई को जाता है। झारखंड गठन की राह में कई झंझावत थे। जहां से राज्य अलग हो रहा था वहां जिनकी सत्ता थी वे लोग प्रारंभ में इसका जोरदार विरोध कर रहे थे। फिर अटल बिहारी वाजपेई जैसे व्यक्तित्त्व ने उन सारी रुकावटों और विरोध का पटाक्षेप करते हुए अलग राज्य का मार्ग प्रशस्त किया और झारखंडवासियों को अलग राज्य की सौगात दी। पूरा झारखंड उनका सदैव ऋणी रहेगा।

संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई असाधारण व्यक्तित्व के धनी एक दूरदर्शी राजनेता थे। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की उन्नति, समृद्धि के लिए खपा दिया। उनके विचार और आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

इस दौरान महापौर रोशनी खलको, पूर्व प्रदेश मंत्री सुबोध सिंह गुड्डु,प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा,महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार साहू, ललित ओझा ,जितेंद्र वर्मा, बलराम सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।

भाजपा की बैठक में छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को नैतिक समर्थन देने का निर्णय

हेमंत सरकार छात्रों, युवाओं के साथ कर रही अन्याय एवं अत्याचार, भर्ती परीक्षाओं की हो सीबीआई जांच : आदित्य साहू

रामगढ़ में भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों एवं सभी मोर्चा के अध्यक्षों की मासिक बैठक संपन्न

प्रदेश पदाधिकारियों की अगली बैठक दुमका में होगी आयोजित

भाजपा जिला कार्यालय, रामगढ़ में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में प्रदेश पदाधिकारियों एवं सभी मोर्चा के अध्यक्षों की मासिक बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह उपस्थित थे।

बैठक संपन्न होने के उपरांत मीडिया को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि राज्य में हेमंत सोरेन सरकार में राज्य की जो वर्तमान स्थिति है, वह जगजाहिर है। राज्य सरकार छात्रों, युवाओं के साथ अन्याय एवं अत्याचार करने का काम कर रही है। छात्र बीते 21 दिनों से शांतिपूर्वक और मर्यादित ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की एक ही मांग है कि पिछले 7 साल में हुई तमाम भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई से जांच हो। परंतु सरकार इस पर गंभीरतापूर्वक ध्यान नहीं दे रही है। छात्रों द्वारा अब अपने आंदोलन को और धारदार तरीके से करने का निर्णय लिया गया है। छात्रों के शांतिपूर्ण सभी आंदोलन को भाजपा का नैतिक समर्थन है। राज्य सरकार को सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा तत्काल करनी चाहिए।

श्री साहू ने कहा उक्त बैठक नियमित प्रक्रिया है जो प्रत्येक माह आयोजित होती है। इसमें आगामी कार्यक्रमों की रचना और पूर्व के कार्यक्रमों की समीक्षा की जाती है। भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है। पार्टी के कई कार्यक्रम चल रहे हैं, इस पर गहन समीक्षा हुई। प्रदेश पदाधिकारियों की अगली बैठक दुमका में आयोजित की जाएगी।

श्री साहू ने कहा कि पिछले 7 वर्षों से JSSC और JPSC परीक्षाओं में जमकर धांधली हुई है। इस सरकार ने युवाओं की नौकरियों को बेचने का काम किया है। छात्र बारिश के मौसम में भूखे प्यासे लगातार आंदोलनरत हैं लेकिन राज्य सरकार इनकी नहीं सुन रही है। यह आंदोलन केवल झारखंड का नहीं रह गया है, अब पूरे देश का विषय बन गया है। पिछले दिनों दिल्ली में एनडीए के सांसदों ने एक स्वर में छात्रों के पक्ष में आवाज उठाया और पैदल मार्च कर आवाज बुलंद की।

श्री साहू ने कहा कि दिल्ली में जब छात्र प्रदर्शन कर रहे थे तो पूरी दुनिया में देखा कि कैसे प्रधानमंत्री को भद्दी भद्दी गालियां दी गई, उनकी दिवंगत माता को भी नहीं छोड़ा गया। झारखंड के छात्र पूरी मर्यादित तरीके से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे रही है। इस मामले में राहुल गांधी और कांग्रेस का दोहरा चेहरा भी पूरी तरह सामने आ चुका है।

इसके पूर्व जिला कार्यालय परिसर में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह सहित पदाधिकारियों के द्वारा एक पेड़ माँ के नाम अंतर्गत वृक्षारोपण भी किया गया।

इस दौरान बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, नीलकंठ सिंह मुंडा, बालमुकुंद सहाय, डॉ प्रदीप वर्मा, सुनील सोरेन, मुनेश्वर साहू एवं गीता कोड़ा, प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा, अमर कुमार बाउरी एवं मनोज सिंह, प्रदेश मंत्री दिलीप वर्मा, शैलेन्द्र सिंह, सरोज सिंह, सुनिता सिंह, अमरदीप यादव, कृष्णा महतो, अमित सिंह, मनीर उरांव एवं शालिनी बैसखियार, कोषाध्यक्ष दीपक बंका, प्रदेश कार्यालय मंत्री हेमंत दास, प्रदेश सह कार्यालय मंत्री सूरज गुप्ता चौरसिया, महिला मोर्चा की अध्यक्षा आरती सिंह, किसान मोर्चा के अध्यक्ष पवन साहू, युवा मोर्चा के अध्यक्ष शशांक राज, एससी मोर्चा के अध्यक्ष किशुन दास एवं अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनवर हयात आदि उपस्थित रहे।

सीएजी रिपोर्ट ने खोली हेमंत सरकार की विफलताओं की पोल : बाबूलाल मरांडी

जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास और मनरेगा में गंभीर अनियमितताएं, गरीबों और ग्रामीणों को उठाना पड़ा खामियाजा

केंद्र से मिली राशि का भी पूरा उपयोग नहीं कर पाई राज्य सरकार

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने हेमंत सरकार की प्रशासनिक अक्षमता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। गरीबों के घर, ग्रामीण रोजगार और हर घर तक नल से जल पहुंचाने जैसी बुनियादी योजनाओं में भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास को लेकर केवल लंबी-लंबी बातें करती है परंतु जमीनी हकीकत इससे इतर है। सरकार का डाटा ही उनकी पोल खोल रहा है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में टेंडर प्रक्रिया और काम की गति को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई निविदाओं में बेहद कम प्रतिस्पर्धा रही और कुछ मामलों में अनुमानित लागत से अधिक दर पर काम दिए गए। सीएजी ने एक ऐसे संवेदक को भी अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से करीब ₹148 करोड़ के काम दिए जाने पर सवाल उठाया, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी।

उन्होंने कहा कि कुछ निविदाओं में मिलीभगतपूर्ण बोली के संकेत भी सीएजी जांच में सामने आए। रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की निविदाओं में केवल दो बोलीदाता थे और जांच में दोनों के डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आई।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में राज्य सरकार की देरी का खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ा। लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर रह गए।

उन्होंने कहा कि मनरेगा में भी राज्य सरकार की लापरवाही सामने आई है। योजना के लिए निधियां 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गईं, जबकि मनरेगा का उद्देश्य ही जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना है। सीएजी ने जांच में ऐसे खर्च भी पाए जिन्हें योजना के तहत स्वीकार्य नहीं माना गया।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को भी उजागर किया है। 31 मार्च 2025 तक ₹1,60,565 करोड़ के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे, जबकि 2024-25 के ₹1,50,938.84 करोड़ के बजट में ₹31,110 करोड़ (20.61%) खर्च नहीं हो सका। वहीं 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले ₹1,916.63 करोड़ में से ₹596.02 करोड़ (31.10%) बिना उपयोग के पड़े रहे। यह बताता है कि सरकार न तो उपलब्ध राशि का समय पर उपयोग कर पा रही है और न ही खर्च का समुचित हिसाब प्रस्तुत कर रही है।

उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट केवल अलग-अलग योजनाओं की कमियां नहीं बताती, बल्कि हेमंत सरकार की पूरी प्रशासनिक और वित्तीय कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। गरीबों को घर नहीं मिल रहा, ग्रामीणों को समय पर रोजगार नहीं मिल रहा, हर घर तक पानी पहुंचाने की योजना गंभीर अनियमितताओं से घिरी हुई है और दूसरी ओर सरकार उपलब्ध बजट तथा केंद्र से मिली राशि का भी पूरा उपयोग नहीं कर पा रही है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब केंद्र सरकार गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संसाधन उपलब्ध करा रही है, तब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू करे। लेकिन सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि सरकार राशि खर्च करने, खर्च का हिसाब देने और योजनाओं को जमीन पर उतारने—तीनों मोर्चों पर विफल रही है।

उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को सीएजी की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए और प्रत्येक वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। जनता के पैसे और जनता के अधिकारों के साथ लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्रों के आंदोलन में कल देर रात रांची के डीसी एवं एसएसपी के द्वारा धरनास्थल पर जाकर छात्रों को धमकाने पर नेता प्रतिपक्ष ने कड़ी आपत्ति व्यक्ति की । उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की जो कमिटी बनायी है, वो या तो छात्रों से बात करे या फिर उसे भंग कर दिया जाए।

इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार, मृत्युंजय शर्मा एवं के.के. गुप्ता भी उपस्थित रहे।

मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है, मगर विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, हंगामा करना है

मैं विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ – श्री अमित शाह

जनता को तय करना है कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है

दिनांक: 12 अगस्त 2026

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने आज स्पष्ट कर दिया कि मोदी सरकार संसद में हर प्रकार की चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ, मगर विपक्ष चर्चा ही नहीं होने देना चाहता। श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और NDA की मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष बस संसद चलने दे।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने विपक्ष के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखते हुए कहा कि विपक्ष आज दोपहर 2 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष महोदय को चर्चा का पत्र लिखकर दे दे, आज 3 बजे से चर्चा शुरू कर दी जाएगी और कल दोपहर 3 बजे तक चर्चा चलेगी। श्री शाह ने कहा कि यदि अध्यक्ष महोदय अनुमति दें तो सरकार प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए भी तैयार है, ताकि आज 3 बजे से देर रात तक और कल 3 बजे तक विस्तृत चर्चा हो सके।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि मैं स्वयं सदन में बैठूँगा, सबको सुनूँगा, हर बात लिखूँगा और कल 3 बजे विपक्ष के एक-एक सवाल का जवाब दूँगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है। चर्चा होने से देश की जनता के सामने सारी बातें स्पष्ट हो जाएँगी – दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री जी ने विपक्ष की माँग पर कहा कि कोई मुझसे कहता है कि आप एक statement दे दो, मगर इतने गंभीर मसले पर इस तरह चर्चा नहीं हो सकती। संसद में चर्चा करने के नियम और तरीके बने हैं, संसदीय पद्धति में विस्तार से (at length) चर्चा होती है और संसदीय परंपरा के अनुसार ही statement दी जाएगी।

श्री अमित शाह जी ने कहा कि जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, वे लगातार संसद आ रहे हैं, मगर विपक्ष दोनों सदनों में संसद को चलने ही नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू जी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है, चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष पहले यही माँग कर रहा था, सरकार ने हाँ बोल दिया है।

अंत में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उसे चर्चा करनी है या हंगामा, और जनता तय करेगी कि कौन चर्चा करना चाह रहा है और कौन भाग रहा है।

जनता को झूठे सपने दिखाकर भ्रमित करना बंद करें सीएम, निवेश और रोजगार पर सरकार जवाब दे: संदीप वर्मा

निवेश को लेकर पिछले विदेश यात्रा पर श्वेत पत्र जारी करे हेमंत सरकार।

दिल्ली में राज्य की निवेश पर चर्चा और वित्त मंत्री की दिल्ली में रहने के बाद भी अनुपस्थिति, समझ से परे।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा है कि वे झारखंड की जनता को झूठे सपने दिखाकर ठगना बंद करें। सबसे बड़ा धोखा वही होता है, जब जनता को सुनहरे सपने दिखाए जाएं और फिर उन्हें बीच रास्ते में ही तोड़ दिया जाए।

संदीप वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार का सपना दिखाया, लेकिन लाखों युवा आज भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं। महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिया गया, लेकिन प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। अब सरकार नए उद्योगों और निवेश का सपना दिखा रही है, जबकि धरातल पर इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
संदीप वर्मा ने कहा निवेश संबंधी इस स्टेक होल्डर मीट में दूसरे विभागों के मंत्री उपस्थित दिखे लेकिन राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली में रहते इस महत्वपूर्ण बैठक से दूर रहकर इसकी गंभीरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ।इससे भी ये प्रतीत होता है होटल ताज की ये मीट सिर्फ यहाँ के लोगो के साथ छलावा है ।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री से सात वर्षों का हिसाब मांगती है। मुख्यमंत्री बताएं कि उनके कार्यकाल में झारखंड में कितने बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं और उनसे कितने स्थायी रोजगार का सृजन हुआ है। जानकारी के अनुसार सरकार एक भी बड़ा उद्योग स्थापित कराने में सफल नहीं रही है।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री अपने पूरे प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वीडन, स्पेन, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन की यात्रा पर गए थे। अब उस यात्रा को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। सरकार को बताना चाहिए कि इस विदेश दौरे पर राज्य की जनता के कर के कितने पैसे खर्च किए गए और उसके बदले झारखंड को अब तक कितना वास्तविक निवेश प्राप्त हुआ तथा कितनी परियोजनाएं धरातल पर उतरीं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल गवर्नेंस की बात करती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक राज्य में कितने आईटी पार्क, स्टार्टअप हब, टेक्नोलॉजी सेंटर या इनोवेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिससे झारखंड के युवाओं को आधुनिक रोजगार के अवसर मिल सकें।

पर्यटन नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला राज्य है, लेकिन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आज भी सड़क, पेयजल, शौचालय, आवास, सुरक्षा और प्रचार-प्रसार जैसी बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं। सरकार बताए कि पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी निवेशक के लिए सबसे पहली आवश्यकता सुरक्षित, पारदर्शी और कानून आधारित वातावरण होती है। झारखंड में लगातार बढ़ती रंगदारी, अपराध, अवैध खनन और भ्रष्टाचार की घटनाएं निवेशकों का विश्वास कमजोर करती हैं। सरकार स्पष्ट करे कि इन गंभीर समस्याओं पर अब तक कौन-कौन से प्रभावी और परिणामकारी कदम उठाए गए हैं।

श्री वर्मा ने कहा कि सरकार वर्षों से निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का दावा करती रही है, लेकिन उद्योग जगत आज भी प्रक्रियाओं की जटिलता और देरी की शिकायत करता है। मुख्यमंत्री बताएं कि इस व्यवस्था को वास्तव में प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार किए गए हैं और उसका क्या परिणाम सामने आया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने का दावा करते हुए योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन नए उद्यमियों और नवाचार आधारित स्टार्टअप को आवश्यक सहयोग नहीं मिल सका। जबकि केंद्र सरकार लगातार स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों का सहयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अब केवल घोषणाएं और बड़े-बड़े भाषण नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम चाहती है। मुख्यमंत्री को निवेश, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। भाजपा राज्य सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा करती है तथा जनता के हितों से जुड़े इन सवालों का उत्तर मांगती रहेगी।

प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी तारिक इमरान और नीरज सिंह भी मौजूद रहे।

उत्पाद विभाग में 20000 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान पर भाजपा हमलावर, सीएम से मांगा जवाब*

ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए सवाल बेहद गंभीर, इसकी हो निष्पक्ष जांच : अविनेश कुमार

उत्पाद विभाग में 2021-25 की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में तकनीकी गड़बड़ियों के खुलासे को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए इसमें जवाबदेही तय कर उचित कार्रवाई की मांग की है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि पीएजी की ऑडिट रिपोर्ट ने उत्पाद विभाग में गंभीर अनियमितताओं की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यप्रणाली के कारण निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि इस ऑडिट रिपोर्ट में शराब कारोबार की निगरानी व्यवस्था, होलोग्राम छपाई, जीपीएस सिस्टम और राजस्व प्रबंधन से जुड़ी कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में इन कमियों के कारण सरकार को करीब 20 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व नुकसान की बात सामने आई है। रिपोर्ट में होलोग्राम छपाई, जीपीएस निगरानी और दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, वे बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले सुरक्षा होलोग्राम सरकारी व्यवस्था की बजाय निजी वेंडर से छपवाए गए। रिपोर्ट में शराब ढोने वाले वाहनों में लगाए गए जीपीएस सिस्टम के प्रभावी ढंग से संचालित नहीं होने और ऑडिट टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में इन कमियों के कारण निगरानी व्यवस्था और राजस्व संग्रह प्रणाली प्रभावित होने की बात कही गई है।

भाजपा प्रवक्ता ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूरे मामले पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए। साथ ही भाजपा ने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री से इस्तीफे की भी मांग की है और कहा है कि यदि जवाबदेही तय नहीं हुई तो भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में नि:शुल्क नेत्र शिविर का आयोजन, 60 लोगों की हुई जांच

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जन्म-जयंती के अवसर पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

भाजपा प्रदेश कार्यालय में भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, शिक्षाविद् एवं ‘एक देश, एक संविधान’ के उद्घोषक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जन्म-जयंती के अवसर पर संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह द्वारा उनकी प्रतिमा एवं चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान नि:शुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान ASG नेत्र अस्पताल के चिकित्सक डॉ रियाज एवं उनकी टीम के अभिषेक कुमार व रूपेश कुमार के द्वारा 60 लोगों की जांच की गई।

मौके पर संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि देश के निर्माण में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अप्रतिम योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। उनका कर्तत्व और सेवा भाव सिर्फ इतिहास नहीं है, बल्कि उनका कर्तत्व एक जीवन की दृष्टि है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत ही वह दृष्टि है, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनके द्वारा बोया गया बीज, भारतीय जनसंघ, आज विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा के रूप में विशाल वटवृक्ष बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनके संकल्पों एवं सपनों के भारत का निर्माण कर रहा है।

इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, हेमंत दास, परमा सिंह, सीमा सिंह, रमेश सिंह, राहुल अवस्थी , संजय चौधरी, अनिल सिंह सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

रोजमार्टा कंपनी पर राज्य सरकार मेहरबान क्यों : बाबूलाल मरांडी

बिना किसी वैध अनुबंध और बगैर अधिकृत एक्सटेंशन के कंपनी के काम करने एवं करोड़ों भुगतान पर उठाया सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने परिवहन विभाग में गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिवहन विभाग में एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा कर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा है कि ट्रेजरी स्कैम और फर्जी बैंक गारंटी घोटाले पर उठे सवालों का जवाब अभी तक जनता को नहीं मिला है। इसी बीच एक और गंभीर वित्तीय अनियमितता परिवहन विभाग से सामने आ रही है। यह दर्शाता है कि राज्य में हर जगह, हर विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और सरकार इस पर तनिक भी गंभीर नहीं है।

श्री मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार झारखंड में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड की प्रिंटिंग का कार्य करने वाली गुड़गांव की रोजमार्टा कंपनी के साथ राज्य सरकार का अनुबंध 22 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद केवल 22 मार्च 2026 तक का विस्तार दिया गया। इसके बावजूद पिछले लगभग तीन महीनों से बिना किसी वैध अनुबंध और बिना अधिकृत एक्सटेंशन के वही कंपनी कार्य कर रही है, और परिवहन विभाग द्वारा उसे करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा रहा है।

श्री मरांडी ने सवालिया लहजे में पूछा है कि आखिर किस नियम के तहत बिना वैध अनुबंध के भुगतान किए जा रहे हैं? इसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी? क्या वित्त विभाग को इसकी जानकारी है? क्या सक्षम प्राधिकारी या कैबिनेट से इसकी स्वीकृति ली गई थी, या फिर सब कुछ पर्दे के पीछे तय किया गया?

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में जवाब देना चाहिए कि यदि किसी आम ठेकेदार का अनुबंध समाप्त हो जाए, तो क्या उसे एक दिन भी बिना एग्रीमेंट के सरकारी कार्य करने दिया जाएगा? यदि नहीं, तो रोजमार्टा कंपनी के लिए अलग नियम क्यों? उसे यह विशेष संरक्षण किसके इशारे पर मिल रहा है?

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या सरकार इस प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करेगी, या फिर इस मामले में भी ट्रेजरी स्कैम की तरह कुछ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर असली जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास होगा?

रिम्स पार्ट-2 से पहले रिम्स पार्ट-1 को सुधारें स्वास्थ्य मंत्री : राफिया नाज

स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी के बयान पर राफिया नाज़ का पलटवार, कहा— जब अस्पतालों में लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हों, तब रिम्स पार्ट-2 केवल एक छलावा है

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी के रिम्स पार्ट-2 संबंधी बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि झारखंड की जनता को नए सपने नहीं, बल्कि अस्पतालों में जीवन बचाने वाली सुविधाएं चाहिए। जब राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स आज भी डॉक्टरों, नर्सों, दवाइयों, बेड और आवश्यक उपकरणों की कमी से जूझ रहा है, तब रिम्स पार्ट-2 की घोषणा जनता के जख्मों पर मरहम नहीं, बल्कि नमक छिड़कने जैसा ही है।

राफिया नाज़ ने कहा कि झारखंड का गरीब मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है, लेकिन उसे इलाज से पहले लंबी कतारें, खाली वार्ड, दवाइयों की कमी और डॉक्टरों का इंतजार मिलता है। कई परिवार अपने परिजनों को बचाने के लिए कर्ज लेने, जमीन बेचने और दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यह केवल व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2025 की रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। मार्च 2022 तक राज्य में 3,634 स्वीकृत चिकित्सा पदों में से 2,210 पद, 5,872 स्टाफ नर्सों में से 3,033 पद तथा 1,080 पैरामेडिकल पदों में से 864 पद रिक्त थे। वर्षों बीत जाने के बावजूद इन रिक्तियों को नहीं भर पाना बताता है कि स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में गरीब मरीज कभी शामिल ही नहीं रहे।

राफिया नाज़ ने कहा कि रिम्स की बदहाल व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। दवाइयों की कमी, उपकरणों का अभाव, लंबी प्रतीक्षा और संसाधनों की कमी से रोज़ मरीज और उनके परिजन परेशान होते हैं। झारखंड उच्च न्यायालय भी कई बार रिम्स की अव्यवस्था और रिक्त पदों पर सवाल उठा चुका है। ऐसे में पहले रिम्स पार्ट-1 को पूरी तरह सक्षम बनाना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है, उसके बाद ही किसी नए प्रोजेक्ट की बात होनी चाहिए।

राफिया नाज ने कहा कि भाजपा को राज्य सरकार के रिम्स टू की योजना से रत्ती भर भी आपत्ति नहीं है। आपत्ति है इसके लिए सरकार द्वारा गलत स्थल चयन को लेकर, आपत्ति है राज्य में पूर्व के चिकित्सीय संस्थान में बिना व्यवस्था दुरुस्त किए नए संस्थान का सपना दिखाने से। क्या सिर्फ आलीशान भवन समुचित इलाज की गारंटी होती है ? या इसके लिए अस्पतालों में उपकरण, दवा, डॉक्टर सहित अन्य तमाम संसाधन जरूरी होते हैं। रही बात भाजपा की तो भाजपा ने झारखंड में एम्स बनाया, कई मेडिकल कॉलेज बनाया। आयुष्मान योजना जैसी योजना दी, जो गरीबों के लिए वरदान बनी।

उन्होंने कहा कि हाल ही में रांची के एक निजी अस्पताल में एक मरीज के इलाज के बाद लगभग 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता है, जिसने निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी ही छोड़ दी है। यदि सरकारी अस्पताल मजबूत होते तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऐसी आर्थिक तबाही का सामना नहीं करना पड़ता।

राफिया नाज़ ने कहा कि आज भी झारखंड के कई जिलों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है। कहीं गलत ब्लड चढ़ने से लोगों की जान जा रही है, तो कहीं समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से मरीज रास्ते में दम तोड़ रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल रहा, गंभीर मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलने वाली दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं। मजबूर होकर गरीब मरीज बाहर से महंगी दवाइयां खरीदते हैं या इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। आखिर इन मौतों और इस पीड़ा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

राफिया नाज़ ने कहा कि झारखंड की जनता को घोषणाओं और बड़े-बड़े दावों से नहीं, बल्कि बेहतर इलाज से भरोसा मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी जनता को बताएं कि हजारों रिक्त पद कब भरेंगे, सरकारी अस्पतालों में दवाइयां और डॉक्टर कब उपलब्ध होंगे और रिम्स पार्ट-1 को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। जब तक मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक रिम्स पार्ट-2 की बातें केवल एक छलावा और जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हैं।

भय और अराजकता के माहौल में झारखंड में निवेश की बात बेमानी : रविनाथ किशोर

हेमंत सरकार बताए कि अब तक राज्य में कितने निवेश आए और उससे झारखंड को क्या लाभ हुआ

भारतीय जनता पार्टी, झारखंड प्रदेश के प्रवक्ता रविनाथ किशोर ने 8 एवं 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के संदर्भ में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में व्याप्त भय, असुरक्षा और अराजकता के माहौल में निवेश आकर्षित करने की बातें केवल दिखावा प्रतीत होती हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि हेमंत सरकार द्वारा निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से समय-समय पर की गई विदेश यात्राओं, निवेशक सम्मेलनों और अन्य आयोजनों का वास्तविक परिणाम क्या रहा। सरकार स्पष्ट करे कि अब तक राज्य में कितने नए निवेश आए, कितनी परियोजनाएं धरातल पर उतरीं तथा इनसे झारखंड के युवाओं को कितना रोजगार और राज्य को कितना आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।

श्री किशोर ने कहा कि किसी भी राज्य में निवेश का सबसे महत्वपूर्ण आधार बेहतर कानून-व्यवस्था, पारदर्शी प्रशासन और निवेशकों का विश्वास होता है। दुर्भाग्यवश झारखंड में आज अपराध, भय और प्रशासनिक अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों का राज्य की ओर आकर्षित होना कठिन है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास विकास की स्पष्ट कार्ययोजना और दूरदृष्टि का अभाव है। विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है, सरकार के विभिन्न विभागों और मंत्रियों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है तथा कानून-व्यवस्था लगातार चुनौती बनी हुई है। इसके साथ ही राज्य वित्तीय अव्यवस्था की स्थिति का भी सामना कर रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

रविनाथ किशोर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में झारखंड में निवेश लाना चाहती है तो सबसे पहले कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना होगा, पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करनी होगी तथा सड़क, बिजली, जल और अन्य आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करना होगा। निवेशकों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद वातावरण तैयार किए बिना बड़े निवेश की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।

श्री किशोर ने कहा कि झारखंड को पुनः विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रभावी नेतृत्व, स्पष्ट नीति और सुशासन की आवश्यकता है। वर्तमान सरकार इन मोर्चों पर अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है, जिसके कारण राज्य का विकास प्रभावित हो रहा है।

जमशेदपुर की जनता ने अहंकारी हेमंत सरकार के अहंकार को तोड़ा : अमर कुमार बाउरी

स्वत: स्फूर्त बंद रहा जमशेदपुर, ऐतिहासिक जनसमर्थन के लिए भाजपा ने दिया जनता को साधुवाद

जमशेदपुर आज बन चुका है चापड़पुर, पूरे राज्य की विधि व्यवस्था वेंटिलेटर पर

उड़ता पंजाब की राह पर झारखंड, नशे के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा सीधे मुख्यमंत्री और सरकार के हाथों तक पहुंच रहा

राज्य में कहीं भी अत्याचार और शोषण होगा, जनता के पक्ष में भाजपा एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका में खड़ी मिलेगी

भाजपा ने दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग को पुनः दोहराया

भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर जमशेदपुर और आदित्यपुर में पार्टी के द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान मिले अपार जनसमर्थन को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के आह्वान पर बुलाए इस बंदी कार्यक्रम में जमशेदपुर, आदित्यपुर के सभी प्रतिष्ठानों, सभी कंपनियों, ठेला खोमचे वालों तक ने, हर एक नागरिक ने सहयोग किया। यह बंद स्वत: स्फूर्त रहा। जनता ने साबित कर दिया कि यह सिर्फ एक पार्टी का प्रतिरोध नहीं है बल्कि यह आम जनता का प्रतिरोध है। साढ़े छह साल में इस अहंकारी राज्य सरकार का पहली बार जनता ने अहंकार तोड़ने का काम किया है। आज की बंदी सरकार की आँखे खोलने के लिए काफी है। अब राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर है कि इस बंदी से मिले संदेश को वह सकारात्मक लेती है या नकारात्मक। उन्होंने बंदी में समर्थन के लिए जमशेदपुर, आदित्यपुर की जनता, पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को पार्टी की तरफ से साधुवाद दिया है। प्रदेश महामंत्री प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को सस्ती राजनीति से बाज आनी चाहिए। राज्य सरकार, सत्ता में शामिल पार्टियां, साथ ही उनके समर्थन में चलाए जा रहे सोशल मीडिया हैंडल के द्वारा इस मामले को जो डायवर्ट करने का प्रयास किया गया, उसे जमशेदपुर की जनता ने आईना दिखाने काम किया है। सत्ता में शामिल दलों द्वारा गलत नेगेटिव फैलाने की कोशिश को भी जनता ने खारिज कर दिया है। जमशेदपुर की जो नृशंस घटना घटी है और पुलिस ने जो कृत्य किया है उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की है। राज्य सरकार को इस मामले में निर्दोषों को फंसाने, मामले को दूसरी दिशा देने की बजाय वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। पूरे राज्य में कहीं भी जनता पर अत्याचार और शोषण होगा, जनता तकलीफ में होगी, भारतीय जनता पार्टी एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका में वहां खड़ी दिखेगी।

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि जमशेदपुर आज चापड़पुर बन गया है। पूरे राज्य में विधि व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी है। इसकी शुरुआत 2019 में हेमंत सरकार के गठन के साथ ही प्रारंभ हो गई थी। इस सरकार ने हमेशा विधि व्यवस्था से समझौता करने का काम किया है। 2019 में जैसे ही सरकार बनी, चाईबासा में सात लोगों की गर्दन काटकर हत्या कर दी गई थी। यही से इस सरकार की शुरुआत हुई। फिर एसपी, थानों की बोली लगनी शुरू हो गई, अवैध कारोबारों की खुली छूट दी गई, पूरे पुलिस तंत्र को अवैध वसूली में लगा दिया गया। पुलिस के पदस्थापन में एकमुश्त तो पैसा लिया ही जाने लगा, बीच-बीच में टॉप अप भी करने की नई परंपरा की शुरुआत हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे पुलिस की साख गिरती चली गई और ईमानदार पुलिस कर्मियों का मनोबल गिरता चला गया। आज जमशेदपुर की घटना बताती है कि राज्य की पुलिस की साख किस स्तर तक नीचे जा चुकी है।

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि जमशेदपुर की शांति भंग हो चुकी है। खुलेआम नशे का अवैध कारोबार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा ड्रग्स और ब्राउन शुगर का इस्तेमाल जमशेदपुर, आदित्यपुर में हो रहा है। पूरा झारखंड सूखे नशे की जद में है। मुख्यमंत्री का नशा मुक्ति का लगा पोस्टर केवल छलावा साबित हुआ है। उड़ता पंजाब की तर्ज पर झारखंड भी उसी राह पर बढ़ चला है। युवा नशे के चंगुल में हैं। नशे के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा सीधे मुख्यमंत्री और सरकार के हाथों तक पहुंच रहा है। इसके पीछे बड़ा सिंडिकेट है। सिर्फ पुलिस अधिकारियों के तबादले से व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकती है इसके लिए पुलिस प्रशासन और सरकार को अपना खोया इकबाल फिर से वापस लाना होगा।

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर आर्डर का राज स्थापित हो, इस प्रकार की चापड़ वाली घटना की अब जमशेदपुर या कहीं पुनरावृत्ति नहीं हो, जमशेदपुर सहित पूरे राज्य में अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, नशे के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाई जाए, वहीं जमशेदपुर मामले में जिन पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में हत्या हुई है उन पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाया जाए। इन पुलिस कर्मियों ने अपना दायित्व तो निभाने में कोताही बरती ही, साथ ही युवक के इलाज में भी लापरवाही बरती। आज अगर पुलिस सजग होती तो वह युवा आज जिंदा होता। जमशेदपुर की घटना से पूरा राज्य आक्रोशित है। पुलिस प्रशासन का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो, दीनदयाल बरनवाल और रवि नाथ किशोर भी मौजूद थे।

जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं : बाबूलाल मरांडी

आलमगीर आलम के जेल से बाहर आने पर ऐसे जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो

भ्रष्टाचार के मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता, लालू यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर का उदाहरण है सामने

सोशल मीडिया के एक्स पर नेता प्रतिपक्ष ने किया पोस्ट

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आलमगीर आलम को बेल मिलने और इसपर कांग्रेसियों द्वारा मनाए जा रहे जश्न पर को लेकर सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि यह केवल उम्र और बीमारी के आधार पर कड़ी शर्तों के साथ मिली अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं।

उन्होंने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद आज बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार से जमानत पर बाहर आने का मौका मिला। लेकिन इसे “बाइज्जत बरी” होना समझने की भूल कोई न करे।

श्री मरांडी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उनके समर्थक और लाभार्थी जमानत पर ऐसे जश्न मना रहे हैं मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं, पटाखे फोड़े जा रहे हैं, आतिशबाज़ी हो रही है। क्या करोड़ों रुपये की कथित काली कमाई, कमीशनखोरी और गरीबों के हिस्से पर डाका डालने के आरोप अब उत्सव मनाने लायक उपलब्धि बन चुके हैं?

उन्होंने कहा कि जिस मामले में मंत्री के निजी सचिव के घरेलू सहायक के घर से करीब ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए हों, वहाँ जनता सवाल पूछेगी ही। आखिर एक घरेलू सहायक के घर में नोटों का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं। पूरा देश टीवी पर वह दृश्य देख रहा था और झारखंड शर्म से सिर झुकाए खड़ा था।

साथ ही श्री मरांडी ने कहा कि याद रखिए, जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। मुकदमा अभी बाकी है, अदालतें अभी बाकी हैं और कानून की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी। सत्ता, संपर्क और संसाधनों के दम पर कुछ समय की राहत तो मिल सकती है, लेकिन ऐसे मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता। अगर भरोसा न हो तो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर को देख लीजिए। सत्ता गई, उम्र ढली, स्वास्थ्य बिगड़ा, लेकिन पुराने मामलों की परछाई आज भी पीछा नहीं छोड़ रही। भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की दस्तक देर से जरूर आती है, पर आती जरूर है।

कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म नहीं बल्कि जश्न का उत्सव-प्रतुल शाह देव

पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को बेल मिलने पर पटाखा फोड़ना और नाचना दुर्भाग्यपूर्ण

कमीशन,करप्शन और कलेक्शन के मूल मंत्र पर चल रही है सरकार

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि ₹3000 करोड़ के बहुचर्चित टेंडर घोटाले के मुख्य अभियुक्त पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा पटाखे फोड़ना, नाच-गाना करना और उत्सव मनाना झारखंड की राजनीति के नैतिक पतन का सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और उनके सहयोगियों ने जिस प्रकार “बेल उत्सव” मनाया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म का नहीं बल्कि जश्न का विषय बन चुका है।प्रतुल ने कहा कि जिस व्यक्ति के निजी सचिव के सहायक के यहां से ईडी की छापेमारी में ₹32 करोड़ से अधिक नकद बरामद हुआ, जिस मामले में उस सहायक जहांगीर आलम ने स्वयं स्वीकार किया कि पैसा आलमगीर आलम का है, उस मामले में बेल मिलने पर कांग्रेसियों का नाचना पूरे राज्य की जनता का अपमान है। बेल को कांग्रेस “बाइज्जत बरी” की तरह प्रस्तुत कर रही है, जबकि देश की जनता जानती है कि बेल न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, भ्रष्टाचार मुक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं।

प्रतुल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की सरकार ने शायद नया नारा बना लिया है —’जहां घोटाला, वहां शर्म नहीं बल्कि जश्न मनेगा’।प्रतुल ने कहा कि आज झारखंड की स्थिति यह है कि गांवों में पेयजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। कई जलमीनार शोपीस बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग की हालत इतनी बदतर है कि जिला अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और उपकरणों का भारी अभाव है। मरीज रेफर होकर दर-दर भटक रहे हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, बेरोजगार युवा निराश हैं, लेकिन कांग्रेस और झामुमो के नेताओं को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। उन्हें केवल घोटालेबाज नेताओं के स्वागत और बचाव में ऊर्जा दिखाई देती है।प्रतुल ने कहा कि जिस राज्य में किसान परेशान हो, युवा नौकरी के लिए पलायन कर रहे हों, महिलाएं असुरक्षित हों और विकास योजनाओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा हो, वहां सत्ता पक्ष द्वारा “भ्रष्टाचार उत्सव” मनाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

राहुल गांधी स्पष्ट करें कि क्या उनके युग में भ्रष्टाचार को उपलब्धि माना जाता है?

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो ₹3000 करोड़ के टेंडर घोटाले को “उपलब्धि” मानती है? क्या उनके युग में कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति है कि जनता के पैसे की लूट पर जश्न मनाया जाए?प्रतुल ने कहा कि झारखंड की जनता सब देख रही है। जनता को अब समझ में आ चुका है कि यह गठबंधन सरकार विकास नहीं, “कमीशन, करप्शन और कलेक्शन” के मॉडल पर चल रही है। आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस भ्रष्ट और संवेदनहीन राजनीति का जवाब देगी। आज की प्रेस वार्ता में झारखंड प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी श्री योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

झामुमो के पत्र पर भाजपा का पलटवार

प्रधानमंत्री जी राष्ट्रहित में दिन-रात कार्य कर रहे हैं, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं – प्रतुल शाह देव

हेमंत सोरेन जब झारखंड की जनता के टैक्स के पैसे से असम, बंगाल और अन्य राज्यों की राजनीतिक यात्राएं करते हैं, तब क्या वह “राष्ट्रहित” होता है?

जो मुख्यमंत्री आदिवासी मूलवासी के गाढ़ी कमाई से 100 करोड़ का शीश महल बना रहे हो,उसकी पार्टी को प्रश्न करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के पत्र पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा लगता है झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रधानमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ करना चाह रहा है। वैसे भी प्रधानमंत्री देश के अस्मिता और गौरव के प्रतीक होते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की विदेश यात्राओं का उद्देश्य भारत के लिए निवेश, कूटनीतिक मजबूती, रोजगार और वैश्विक सम्मान सुनिश्चित करना है, जबकि हेमंत सरकार की यात्राओं का उद्देश्य केवल सत्ता बचाना और परिवारवादी राजनीति को मजबूत करना दिखाई देता है। प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद के लिए 100 करोड़ का शीश महल रूपी मुख्यमंत्री आवास बना रहे हैं। यह देश के सबसे महंगे और खर्चीले विलासिता के सुविधा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री आवास में एक होगा।

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री की बाहरी राज्यों की राजनीतिक यात्राओं का खर्च सरकारी खजाने से उठाया जा रहा। झारखंड की बदहाल कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, बिजली संकट और भ्रष्टाचार छोड़कर दूसरे राज्यों में राजनीति करना जनता के हित में है?प्रतुल ने जानना चाहा कि क्या मुख्यमंत्री जी ने कभी झारखंड के किसानों, युवाओं और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उतनी गंभीरता दिखाई, जितनी विपक्षी गठबंधन की राजनीति के लिए दिखाते हैं?जब राज्य में विकास योजनाएं ठप हैं, निवेश भाग रहा है और अपराध चरम पर है, तब मुख्यमंत्री जी का लगातार राजनीतिक पर्यटन यात्राएं का क्या औचित्य है?
प्रतुल ने कहा कि झामुमो को यह समझना चाहिए कि राज्य के खजाने पर बोझ डालकर राजनीतिक यात्राएं करने वालों को राष्ट्रहित पर भाषण देने का नैतिक अधिकार नहीं है।

पानी बिजली संकट पर रांची में भाजपा का घड़ा फोड़ आक्रोश प्रदर्शन कार्यक्रम

पानी-बिजली देने की बजाय झारखंड सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई को चुनाव प्रचार में खर्च किया : आदित्य साहू

भाजपा नेताओं ने हेमंत सरकार पर जमकर साधा निशाना

जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर झारखंड ठप्प करने की चेतावनी

झारखंड में अगली सरकार बीजेपी के नेतृत्व में बननी तय : आदित्य साहू

पूरा झारखंड वर्तमान में पानी और बिजली की भीषण संकट से त्राहिमाम कर रहा है। राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में पानी– बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इसी ज्वलंत मुद्दे को लेकर झारखंड भाजपा के महिला पुरुष कार्यकर्ता पिछले सप्ताह भर से राज्य के विभिन्न जिलों में माथे पर मटकी लेकर जोरदार आक्रोश प्रदर्शन कर राज्य सरकार को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने को लेकर आंदोलनरत है। इसी क्रम में आज राजधानी रांची में भाजपा रांची जिला के संयुक्त तत्वावधान में बिजली-पानी संकट को लेकर जिला स्कूल मैदान शहीद चौक से जिला समाहरणालय तक घड़ा फोड़ आक्रोश प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जिला समाहरणालय का घेराव कर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में रांची महानगर, रांची पूर्वी एवं रांची पश्चिमी जिलों के हजारों की संख्या में महिला पुरुष कार्यकर्ता शामिल हुए और सड़कों पर हेमंत सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, रांची विधायक सीपी सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडेय आदि मौजूद थे।

इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में भीषण जल संकट और लगातार हो रही बिजली कटौती से आम जनता का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जिसके चलते लोगों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। भाजपा सदैव जनता के हक, अधिकार और मूलभूत सुविधाओं की लड़ाई मजबूती से लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।

श्री साहू ने चेतावनी दिया कि जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर भाजपा का यह आंदोलन और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर हजारों हजार की संख्या में सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ता झारखंड ठप्प कराने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता देवता होती है जो गद्दी पर बैठाना जानती है तो वह गद्दी से कान पकड़कर उतारना भी जानती है।

श्री साहू ने कहा कि आज काफी गर्मी के बावजूद सड़कों पर उतरी यह भारी भीड़, राज्य सरकार के नाकामियों के प्रति जनाक्रोश का प्रतीक है। आज लोगों का गुस्सा और आक्रोश रांची की सड़कों पर दिखा।

श्री साहू ने कहा कि सरकार के लोग एसी में बैठ कर जनता की परेशानी का मजा उठा रहे हैं। लगता है कि सरकार और प्रशासन के कान की जाली फट चुकी है, इसलिए जनता की आवाज इन तक नहीं पहुंच रही है। लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जो जनता सड़कों पर चिल्ला रही है इन लोगों के घरों में घुसकर उनकी कान की जाली लगाने का काम भी करेगी। इस बेरहम सरकार को जनता की आवाज को सुनना ही पड़ेगा। झारखंड ही एक ऐसा राज्य है जहां इस राज्य की जनता की गाढ़ी कमाई से एक इंजीनियर का बेटा हिमालया के पानी से स्नान करता है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड की जनता की गाढ़ी कमाई को हेमंत सरकार ने पूरी कैबिनेट के साथ बंगाल और असम राज्य में चुनाव के दौरान उड़ाने का काम किया है। जिन पैसे से जनता को पानी बिजली देना था झारखंड सरकार ने उस पैसे को चुनाव प्रचार में खर्च किया।

श्री साहू ने आश्वस्त किया कि झारखंड में जब भी अब विधानसभा चुनाव होगा, कांग्रेस, राजद और jmm को मुंह की खानी पड़ेगी। बीजेपी के नेतृत्व में इस राज्य में अगली सरकार बननी तय है।

श्री साहू ने कहा कि बीजेपी सेवा भाव से काम करती है। बीजेपी झारखंड के करोड़ों नागरिकों की परेशानी को यूं ही नहीं देख सकती है। इसी कारण राज्य भर के जिलों में बीजेपी कार्यकर्ता और महिलाएं माथे पर घड़ा लेकर इस चिलचिलाती धूप में प्रदर्शन कर सरकार को जगाने का काम कर रही है।

श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना झारखंड में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जिस पैसे से घर-घर में पीने का पानी पहुंचाने की योजना थी उसे यह सरकार डकार चुकी है। हजारों करोड़ रुपए बैंक में भी पड़े हुए हैं लेकिन नल से जल योजना पहुंचाने की इच्छा शक्ति सरकार में कतई नहीं है। नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी सभी वर्ग की चिंता करते हैं जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस के समर्थन से चल रही है झारखंड सरकार नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए पैसे की बंदरबांट में लगी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि केवल रांची ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में पानी और बिजली की भारी दुर्दशा है। भारत सरकार ने ₹5000 करोड़ से अधिक की राशि नल से जल योजना के लिए देने का काम किया लेकिन घोटालेबाजों द्वारा सारे पैसे खा लिए गये। झारखंड सरकार घोटालेबाजों की सरकार है। यहां बिजली की भारी किल्लत है, पूरी अराजकता फैली हुई है। राज्यभर में किसान, मजदूर, आम नागरिक पूरी तरह त्रस्त हैं। यह सरकार सभी का दोहन कर रही है। आज का यह आंदोलन सांकेतिक हैं, सुधार नहीं किया गया तो जनता सर फोड़ना भी जानती है। जब तक समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि संघर्ष के रास्ते पर चलकर पश्चिम बंगाल की तरह झारखंड सरकार को भी उखाड़ फेंका जाएगा।

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में पानी और बिजली की गंभीर समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन का इस ओर कोई ठोस ध्यान नहीं है। आम जनता बिजली-पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए परेशान है और सरकार केवल तमाशबीन बनी हुई है।
जनता को राहत देने के बजाय राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से लगातार मुंह मोड़ रही है। भाजपा जनता की आवाज बनकर इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और हर घर तक पानी पहुंचाने और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

श्री सेठ ने कहा कि इस सरकार ने जनता को केवल मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने का काम किया है। इस सरकार के सारे वादे फिसड्डी साबित हुए। झारखंड का शासन-प्रशासन केंद्र की मोदी सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जा रही राशि का समुचित उपयोग करने में भी पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। यही कारण है कि महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन जैसी कई योजना झारखंड में फ्लॉप होने की कगार पर पहुंच गई है।

इसके अलावा कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडेय, विधायक सीपी सिंह, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, रांची पूर्वी जिला अध्यक्ष विनय महतो, रांची पश्चिमी जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, आरती सिंह, शशांक राज, आरती कुजूर, काजल प्रधान, कमाल खान, सुबोध सिंह गुड्डू, सूरज चौरसिया,प्रतुल शाहदेव ,सत्य नारायण सिंह, मनोज मिश्रा, के. के गुप्ता, सुरेंद्र महतो, बलराम सिंह, जितेंद्र वर्मा, मनोज चौधरी, सत्यदेव मुंडा, सुधाकर चौबे, राकेश भास्कर, संदीप वर्मा, शोभा यादव, कृपाशंकर सिंह, संजय जयसवाल, ललित ओझा, सीमा सिंह,अरुण झा, सुनील साहू, राजू सिंह, वीणा मिश्रा, संकेत तिवारी, रेखा महतो, अर्चना सिंह, विनय राज, हरेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह,दिलीप सेठ, माधुरी देवी,अनुराधा मुंडा,रणधीर चौधरी, रामकुमार दुबे, विंध्याचल महतो ,सुषमा देवी, शत्रुघ्न साहू, चूड़ामणि महतो, संजीत सिंह, गोपाल महतो, अणिमा लकड़ा, पायल सोनी सहित सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अमूमन अपराधियों का पुलिस करती है पर्दाफाश, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर पुलिस का खोल रहे हैं कच्चा चिट्ठा : बाबूलाल मरांडी

धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दोनों पक्षों में मानो यह होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा

नेता प्रतिपक्ष ने प्रिंस खान के वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो को लेकर हेमंत सरकार को फिर घेरा

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने
कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के मीडिया में वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो को लेकर फिर से हेमंत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा है कि आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का “मूल्यांकन” भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

श्री मरांडी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के।

श्री मरांडी ने आगे लिखा है कि सबसे भयावह पक्ष ‘सत्ता संरक्षण’ की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की ‘बोली’ लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” की तरह काम कर रही है?

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा है कि यदि वसूली की मानसिकता वाली यह कार्यशैली जारी रही, तो झारखंड ‘जंगलराज’ से भी बदतर स्थिति में पहुँच जाएगा। जब रक्षक ही भय का कारण बन जाएं, तो लोकतंत्र खतरे में है। जनता अब पूछ रही है—आखिर कब तक चलेगा यह “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” देने का धंधा?

महंगाई पर झामुमो का आंदोलन केवल और केवल राजनीतिक नौटंकी : आदित्य साहू

विश्व भर में महंगाई की ब्रांड एंबेसेडर के रूप में विख्यात रही कांग्रेस के साथ गलबहियां कर सरकार चलाने वाली jmm को महंगाई पर बोलने का हक नहीं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने महंगाई पर सत्तारूढ़ दल झामुमो के आंदोलन को राजनीतिक नौटंकी बतलाया है। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा द्वारा प्रदेश में जनमुद्दों पर अनवरत आंदोलन से सत्तारूढ़ दल हताशा में है। झामुमो का यह आंदोलन हर मुद्दे पर अपनी पार्टी की विफलता को छुपाने और राज्य में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने का नाकाम प्रयास भर है। विश्व भर में महंगाई की ब्रांड एंबेसेडर के रूप में विख्यात रही कांग्रेस के साथ गलबहियां कर यहां सरकार चलाने वाली jmm को महंगाई पर तो कम से कम बोलने का रत्ती भर भी हक नहीं है। झामुमो केवल और केवल राजनीतिक ड्रामा कर रही है।

श्री साहू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में पेट्रोल डीजल पर कई बार उत्पाद शुल्क कम किया गया। वैश्विक भारी उथल पुथल जैसे हालातों के बीच जब पूरी दुनिया चिंतित थी, तब केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाकर देशवासियों को बड़ी राहत देने का काम किया गया। Jmm आम लोगों की बहुत हितकर है तो पेट्रोल डीजल पर वैट क्यों नहीं घटाती ? आज झारखंड में बिजली दर में वृद्धि के कारण उद्योग धंधे बंदी के कगार पर हैं। आम लोग महंगी बिजली बिल से परेशान हैं। यह सब jmm को नहीं दिखता।

श्री साहू ने कहा कि आज वैश्विक संकट के कारण पूरा विश्व ही परेशान है। यह सभी जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में अवरोध के कारण कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगी हुई है। यह सिर्फ भारत में ही तो महंगा नहीं हुआ है। इस विपरीत परिस्थिति में भी केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह नियंत्रित रखने का काम किया है। पूरी दुनिया में आज ऊर्जा संकट किसी से छिपा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों से अपने व्यक्तिगत संबंधों और सूझबूझ से भारत की जनता को पूरी राहत देने की जो कोशिश की है, वह सराहनीय है। दूसरी तरफ झारखंड सरकार महंगाई पर केवल बयानबाजी और राजनीति कर रही है। इन्हीं दलों ने चुनाव पूर्व 450 रुपए में आम लोगों को गैस सिलेंडर देने का वादा किया था। इन्हें 450 रुपए में आम लोगों को गैस सिलेंडर मुहैया कराने से किसने रोका है ?Jmm और कांग्रेस वाले केवल राजनीतिक ड्रामा नहीं करें और जनहित के जो मुद्दे भाजपा सिलसिलेवार तरीके से उठा रही है, इस के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करें। जनता इन दलों के चेहरे को अच्छी तरह पहचानती है।

भाजपा कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी करार देने वालों दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ बाबूलाल ने एक्स पर लिखकर दिखाया आईना

वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला

फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार से भी उनके कदम नहीं डगमगाए

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का ‘गिफ्ट’ है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में “लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह ‘गिफ्ट’ नहीं, शहीदों का बलिदान है!” पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने “लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने” वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के ‘खूनी खेल’ की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक “चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी” में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक “15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर” में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।
2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी ‘तेरहवीं’ पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह ‘गिफ्ट’ नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे “चुनाव आयोग की सेटिंग” कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे ‘मेहरबानी’ कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के ‘बलिदान’ की जीत है!

गोड्डा में आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की प्रसूता की मौत पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को घेरा

कहा

यह एक प्रसूता की मौत नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम की मौत : आदित्य साहू

मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र का जब यह हाल तो प्रदेश के अन्य इलाकों में कुव्यवस्था का लगाया जा सकता है सहज अंदाजा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गोड्डा जिला अंतर्गत कुसुमघाटी निवासी आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की मीरा मालतो नामक प्रसूता की समुचित स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में मौत पर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह एक प्रसूता की मौत नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम की मौत है। सबसे दुखद है कि यह मामला राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट से जुड़ा हुआ है। जब मुख्यमंत्री के निर्वाचन विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल है तो पूरे राज्य में इस विभाग में फैले कुव्यवस्था का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी करारा प्रहार करते हुए कहा कि झारखंड गठन के बाद इस प्रकार का निकम्मा स्वास्थ्य मंत्री नहीं देखा गया। अपना काम छोड़कर स्वास्थ्य मंत्री केवल गैर जरूरी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। पूरे स्वास्थ्य सिस्टम का कबाड़ा करके इस सरकार ने छोड़ दिया है। यह कुव्यवस्था अब जानलेवा बन चुकी है।

श्री साहू ने कहा कि हेमन्त सोरेन सरकार अबुआ सरकार होने का दंभ भरती रहती है। लेकिन इस सरकार में आदिम जनजातियों की स्थिति ही काफी गंभीर है। मृत प्रसूता भी आदिम जनजाति से ही थी। यह सर्वविदित है कि यह समुदाय आज अपने अस्तित्व को लेकर संघर्षरत है। बावजूद राज्य सरकार की इस समुदाय के प्रति यह उदासीनता शर्मनाक और चिंतनीय है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मीरा मालतो को उनके परिजनों द्वारा पहले राजाभीठा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था और वहां से प्रसूता को गोड्डा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिर वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां ऑपरेशन के दौरान उनकी मौत हो जाती है।

श्री साहू ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही सरायकेला के राजनगर में मोबाइल की रोशनी में प्रसव के दौरान मां बेटे की मौत से इस सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। अगर सबक लिया होता तो इस प्रकार की तस्वीर पुनः सामने नहीं आती। दरअसल राज्य सरकार को आम लोगों की जान माल की चिकित्सीय सुरक्षा से कोई सरोकार ही नहीं है। सरकार केवल लूट खसोट में लगी हुई है। यहां पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ही ध्वस्त है। कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब स्वास्थ्य विभाग में कुव्यवस्था को लेकर अखबारों में खबरें प्रकाशित नहीं होती हो।

श्री साहू ने कहा कि पहले ही खटिया, ठेला एंबुलेंस से सिस्टम दागदार होता रहा है। यहां तो अब थैले में, कार्टून में एक छोटे बच्चे का शव पिता द्वारा ढोकर ले जाने की घटना घट चुकी है। आए दिन हो रही इस प्रकार की मौत का जिम्मेवार कौन है मुख्यमंत्री जी ? अगर आप लोगों से व्यवस्था नहीं संभलती तो राज्य के गरीब आदिवासियों और अन्य लोगों की जान लेने पर क्यों तुले हैं ? इस्तीफा क्यों नहीं दे देते ?

श्री साहू ने राज्य सरकार को चेताते हुए कहा कि भाजपा मूकदर्शक बनी नहीं रह सकती है। अगला आंदोलन राज्य में ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ही किया जाएगा।

राज्य सरकार 10000 करोड़ के मदर ऑफ ऑल स्कैम ट्रेजरी घोटाले को सुनियोजित तरीके से दफनाने में लगी- प्रतुल शाह देव

एसआईटी में उन लोगों को सदस्य बनाया गया जिन पर खुद जांच की तलवार लटकी

वित्त विभाग ने सिर्फ क्लर्क, किरानी को हटाने का आदेश दिया,बड़े मछलियों को खुला छोड़ दिया

सरकार स्पष्ट करे कि बोकारो स्ट्रांग रूम में जमा 14 किलो सोना सुरक्षित है?

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर 10000 करोड़ के ट्रेजरी स्कैम को सुनियोजित तरीके से दफनाने का आरोप लगाया।प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार ने वित्त विभाग के निर्णय के आलोक में पत्रांक (2)- 12/26, 252 के जरिए वित्तीय कार्य से जुड़े 3 वर्ष से ज्यादा एक ही पद पर जमे सिर्फ क्लर्क और किरानी के ट्रांसफर का आदेश दिया। एसपी,डीएसपी और ट्रेजरी अफसर यथावत पदों पर आज भी बने हुए हैं। असली आरोप तो इन पर ही लगा था जो आज भी जमे हुए हैं

प्रतुल ने कहा की उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी एसआईटी की टीम ने 2020 से रिकॉर्ड मांगा है। 8 मई को यह टीम बोकारो जाने वाली है ।एजी की आपत्ति के बाद अब ये 2011 से रिकॉर्ड मांग रही है।इस घोटाले को दबा देने की पूरी प्लानिंग है।तभी जांच समिति में सीआईडी के वर्तमान दो आईजी को छोड़कर पुलिस के मानवाधिकार आईजी को कमान दी गई है। इसके अतिरिक्त एसआईटी टीम के जो सदस्य हैं उसमें से एक 2022 के दौरान बोकारो के भी एसपी थे और 2014-16 के दौरान हजारीबाग के डीएसपी थे ।इस दौरान दोनों जिला में भी ट्रेजरी घोटाला हुआ था। इस जांच समिति के एक और सदस्य डीआईजी स्तर के एक अधिकारी 27 नवंबर, 2017 से बोकारो एसपी थे। वह 2019 तक इस पद पर रहे।2018 में अकाउंटेंट कौशल पांडे का बोकारो तबादला हुआ। कौशल पांडे ही इस पूरे घोटाले का किंग पिन माना जाता है। उस समय अकाउंट सेक्शन की हेड क्लर्क प्रभा टोप्पो को हटाकर कौशल पांडे को प्रभार दे दिया गया।

प्रतुल ने कहा की बोकारो के स्ट्रांग रूम में लगभग 12 से 14 किलो तक सोना जमा है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह सोना अभी भी वहां मौजूद है या कोई हेरा फेरी हो गई है। प्रतुल ने कहा कि जो एसआईटी जाए ,वह स्ट्रांग रूम की भी जांच कर इस सोने का भौतिक सत्यापन करे।

प्रतुल ने कहा कि झारखंड वित्तीय नियमावली एवं ट्रेजरी कोड के नियम 305 के अनुसार डीडीओ को अपने अधीन पैसे के खर्च की उस तरह चिंता करनी चाहिए जैसा वह अपने घर के लिए खर्च कर रहे हो। प्रतुल ने कहा पर यह आश्चर्यजनक बात है कि एक माह बीत जाने के बाद भी डीडीओ और ट्रेजरी ऑफिसर अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं। एसआईटी को जांच के लिए इन्हीं अफसर से मदद लेना है।ये न सिर्फ सुबूत मिटा सकते हैं बल्कि जांच समिति को भी गुमराह कर सकते हैं।

पीएजी ने गंभीर अनियमितता पकड़ी थी

प्रतुल ने कहा इससे पहले प्रिंसिपल एजी में दो अप्रैल,2026 की रिपोर्ट में ही भौतिक सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर ट्रेजरी में गड़बड़ी के सबूत पेश किए थे। रिपोर्ट के अनुसार 58% डी ए को कई गुना ज्यादा बढ़ा कर लिया गया।रिपोर्ट में मास्टर डाटा कंट्रोल में बड़ी कमजोरी पाई गई ।इसी रिपोर्ट में 2175 मामले ऐसे आए जिनके जन्मतिथि 2023 और 2026 के बीच में बदल दी गई ।इसी कालखंड में 2890 पैन नंबर के साथ भी फेरबदल हुआ और 5037 सरकारी कर्मचारियों के जॉइनिंग डेट के साथ भी छेड़छाड़ की गई।

प्रतुल ने कहा कि सरकार का जो रवैया है उस से स्पष्ट है कि वह मदर आफ स्कैम को दबाने की कोशिश हो रही है।इसलिए राज्य सरकार को अविलंब इस पूरे मामले की ईडी और सीबीआई जांच के आदेश देने चाहिए। अगर राज्य सरकार ऐसा नहीं करती है तो भारतीय जनता पार्टी भविष्य में उचित कदम उठाएगी आज के प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे।

भाजपा का सवाल: अभियंताओं को धमकाने वाला बबलू मिश्रा कौन है? हो उच्चस्तरीय जांच

भारतीय जनता पार्टी ने प्रेसवार्ता के माध्यम से यह गंभीर प्रश्न उठाया है कि ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं को धमकाने वाला बबलू मिश्रा आखिर कौन है और उसे संरक्षण कौन दे रहा है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि जिस व्यक्ति पर खुलेआम सरकारी अभियंताओं को डराने-धमकाने, गाली-गलौज करने, अपमानित करने और मनचाहे ठेकेदारों को काम दिलाने का आरोप है, उसकी भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच बेहद आवश्यक है।

उन्होंने मांग की कि बबलू मिश्रा के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों, स्टाफ और पीए के कॉल रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जाए। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास कार्यालय में उसके आने-जाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज की भी जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे नेटवर्क और उसके प्रभाव का स्पष्ट खुलासा हो सके।

अजय साह ने आगे कहा कि जिस पत्र को मुख्य अभियंता, अभियंता प्रमुख और विभागीय सचिव को भेजा गया, उस पर 11 दिनों तक कोई कार्रवाई या प्रतिक्रिया न होना अत्यंत संदेहास्पद है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी द्वारा मामला संज्ञान में लेने के बाद ही अधिकारी सक्रिय हुए, वह भी निष्पक्ष जांच के लिए नहीं बल्कि मामले की लीपापोती करने के उद्देश्य से। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि संबंधित पत्र की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि उसकी सत्यता सामने आ सके।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पत्रों में बबलू मिश्रा का उल्लेख होने के कारण उसकी भूमिका और हस्तक्षेप की जांच अनिवार्य हो जाती है।

अजय साह ने आरोप लगाया कि जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन झारखंड में “जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, उतना बड़ा पदाधिकारी” का मॉडल चला रहा है। इसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम को गंभीर आरोपों के बावजूद महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखा गया, जबकि आलमगीर आलम जैसे नेता को जेल में रहने के बावजूद प्रदेश कमिटी में स्थान देकर कांग्रेस द्वारा पुरस्कृत किया गया।

उन्होंने कहा कि भले ही वीरेंद्र राम और आलमगीर आलम आज सीधे तौर पर विभाग में सक्रिय न हों, लेकिन उनके द्वारा स्थापित भ्रष्टाचार का मॉडल आज भी विभाग में लागू है। ऐसे में पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। प्रेस वार्ता में मीडिया सह प्रभारी अशोक बड़ाईक भी मौजूद थे।

*ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर घोटाले को दबाने के लिए हुए पत्र घोटाले की हो फॉरेंसिक जांच: अजय साह

भाजपा ने आरोप लगाया कि झारखंड ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर घोटाले को दबाने के लिए पत्र घोटाला किया गया। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग, झारखंड सरकार के कुछ अभियंताओं द्वारा 23 अप्रैल को एक गंभीर पत्र जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक व्यक्ति—बबलू मिश्रा—द्वारा अभियंताओं को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और सरकारी टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह पत्र 23 अप्रैल से ही विभिन्न स्तरों पर प्रसारित होता रहा और विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

अजय ने बताया कि 4 मई 2026 को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी जी ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई और जांच की मांग की। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, जैसे ही यह मामला राजनीतिक स्तर पर सक्रिय हुआ, उसी दिन अभियंताओं की ओर से एक दूसरा पत्र जारी किया गया, जिसमें पहले वाले पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दे दिया गया।

भाजपा ने इस पूरे संदर्भ में कहा है कि राज्य सरकार दोनों पत्रों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सा पत्र असली है और कौन सा फर्जी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि 23 अप्रैल से लेकर 4 मई तक अभियंताओं की ओर से कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं आया और नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप के तुरंत बाद ही नया पत्र क्यों जारी किया गया। भाजपा ने यह भी मांग की है कि इस बात की गहन जांच हो कि क्या अभियंताओं पर किसी प्रकार का दबाव बनाकर उन्हें अपना पूर्व बयान बदलने के लिए मजबूर किया गया। इसके अतिरिक्त, पत्र में उल्लिखित बबलू मिश्रा की पहचान, भूमिका एवं प्रभाव की उच्चस्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि वे किस हैसियत से सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे थे। भाजपा ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का ही नहीं, बल्कि राज्य की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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