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जी राम जी योजना के खिलाफ कांग्रेस के आंदोलन पर बोले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी

कांग्रेस पार्टी बताए विकसित भारत और भगवान राम से नफरत क्यों….बाबूलाल मरांडी

मोदी सरकार में नाम नहीं काम बोलता है

कांग्रेस पार्टी ने अपने शासन में 600 संस्थानों ,योजनाओं और पुरस्कारों के नाम बदले

जवाहर रोजगार योजना को नरेगा,फिर मनरेगा कांग्रेस ने क्यों किया

महात्मा गांधी की भावना के अनुरूप बनी है जी राम जी योजना

कांग्रेस द्वारा जनता को दिग्भ्रमित करने से नहीं रुकेगा विकसित भारत का काम

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पार्टी द्वारा वी बी गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना का विरोध किए जाने पर बड़ा निशाना साधा।

श्री मरांडी ने कहा कि हर गरीब को रोजगार मिले,उसकी गरिमा का सम्मान हो।गरीब ,जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले इसके लिए जी राम जी योजना को लाया गया है।लेकिन कांग्रेस को ये सब पसंद नहीं।

कहा कि नई योजना में हर ग्रामीण परिवार को हर साल अब 100 दिन की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी ।साथ ही काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान है लेकिन कांग्रेस को गरीबों की भलाई वाली योजना पसंद नहीं है।कांग्रेस को लूट भ्रष्टाचार की आदत लगी हुई है,इसलिए वैसी योजनाएं जिसमें लूट और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है कांग्रेस को पसंद है।

कहा कि जिस मनरेगा की बात कांग्रेस पार्टी कर रही है उस के सर्वाधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अबतक देश में 11.74 लाख करोड़ खर्च हुए हैं जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

कहा कि जिस योजना के नाम बदलने का हंगामा कांग्रेस पार्टी कर रही है उसका पहले नाम महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था।1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया।बाद में राजीव गांधी जी ने उसका नाम जवाहर रोजगार योजना कर दिया।मनमोहन सिंह की सरकार ने इसे 2004 में नरेगा और 2005 में मनरेगा कर दिया। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना को कांग्रेस ने इंदिरा आवास योजना किया। ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना किया। झारखंड में तो कांग्रेस समर्थित सरकार ने झारखंड निर्माता अटल जी के नाम पर चल रही अटल क्लीनिक का नाम मदर टेरेसा के नाम पर कर दिया।

कहा कि कांग्रेस पार्टी की सरकार नेहरू गांधी परिवार के नाम पर जबरन योजनाओं के नाम करने में विश्वास करती है लेकिन मोदी सरकार का नाम नहीं बोलता,काम बोलता है।

कहा कि कांग्रेस पार्टी बताए क्या योजना का नाम बदलकर कांग्रेस ने जवाहर लाल नेहरू का अपमान किया था क्या?

कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने केलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करनी है 2005 में मनरेगा शुरू हुई लेकिन अब ग्रामीण भारत बदल गया है।कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है।आजीविका में विविधता आई है।पुराना ओपन एंडेड मॉडल अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता।आज की जरूरतें बदली हैं इसलिए नई योजना को ग्रामीण क्षेत्र की आवश्यकता सके अनुरूप व्यवस्थित किया गया है।

कहा कि कांग्रेस की सरकार ने मनरेगा में कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं थी।अब जी राम जी योजना में रियल टाइम डेटा अपलोड होगा,मोबाइल से मॉनिटरिंग होगी,एआई द्वारा फ्रॉड का डिटेक्शन होगा।और सही लाभार्थियों को काम मिलेगा ।गरीबों,मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

कहा कि नई योजना को किसान और मजदूर दोनों के हित को ध्यान में रखकर बनाया गया है। बुवाई और कटाई के मौसम को मिलकर वर्ष में 60दिन काम बंद रहेगा।जबकि मनरेगा में खेती के मौसम में लूट होती थी,फर्जीवाड़ा होता था।

कहा कि इतना ही नहीं अब मजदूरों को मजदूरी भुगतान साप्ताहिक करने की व्यवस्था की गई है।

कहा कि कांग्रेस को इससे परेशानी है। विकसित भारत और भगवान श्रीराम के नाम से नफरत है। इसलिए विरोध की साजिश रची जा रही है।

कहा कि कांग्रेस पार्टी ने देश के लगभग 600 संस्थाओं ,योजनाओं,पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर रखे। खानदान के लोगों की जयंती को राष्ट्रीय पर्व बना दिए । खेल से जिनका कोई नाता नहीं उनके नाम पर खेल रत्न पुरस्कार बना दिया।। सरदार पटेल,नेताजी सुभाष,लाल बहादुर शास्त्री जैसे राष्ट्रभक्त नेताओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने या परिवार के नाम पर योजना का नामकरण नहीं किया बल्कि नाम को सेवा से जोड़ा। राजभवन लोक भवन बन गया राजपथ कर्त्तव्य पथ, रेस कोर्स लोक कल्याण मार्ग,पीएमओ सेवा तीर्थ बन गया।

नए डीजीपी की नियुक्ति पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार को दिखाया आईना,कहा…

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केलिए नियम,कानून,संविधान , न्यायालय कोई मायने नहीं रखता….बाबूलाल मरांडी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर हेमंत सरकार पर निशाना साधा।

श्री मरांडी ने तंज कसते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को उनके निर्णय केलिए बधाई दी और कहा कि
बधाई इस बात के लिये कि आपने बता दिया है कि नियम, क़ानून, संविधान, न्यायालय आपके कोई मायने नहीं रखता।

श्री मरांडी ने कहा कि इतिहास में जंगल राज चलाने वालों में अपना नाम सबसे उपर लिखाने के लिये मुख्यमंत्री चाहें तो सुप्रियो भट्टाचार्य को भी डीजीपी बना सकते हैं।कहा कि यह तो उन्होंने अपने निर्णय से साबित कर ही दिया है। लगे हाथ यह काम भी कर ही देना चाहिए।

कहा कि लेकिन इतना जरूर है कि क़ानून, संविधान, न्यायपालिका की परवाह भले ही मुख्यमंत्री नहीं करें लेकिन भगवान से जरूर डरें ।

कहा ईश्वर के घर देर है अंधेर नहीं। वो सब देख रहा है। उसकी लाठी चलती है तो आवाज़ नहीं होती पर चोट बहुत लगता है।

श्री मरांडी ने वर्षांत के दिन सांकेतिक प्रहार करते हुए नए वर्ष की शुभकामनाएं दी।कहा नए साल में नए संघर्ष की शुरूआत होगी।

कांग्रेस पार्टी गांव,गरीब,किसान विरोधी….आदित्य साहू

जी राम जी योजना के पक्ष में अभियान चलाएंगे भाजपा कार्यकर्ता

आगामी 8 से 10 जनवरी तक सभी मंडलों में करेंगे सभा,गोष्ठी

भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू ने आज कांग्रेस पार्टी द्वारा जी राम जी योजना के संबंध में किए जा रहे दुष्प्रचार पर बड़ा निशाना साधा।

श्री साहू ने कहा कि जब मनरेगा में फर्जीवाड़ा,भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा हो गया, कई सुधार के प्रयासों के बावजूद स्थिति नहीं बदली तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने विकसित भारत 2047 के संकल्पों को धरातल पर उतारने और उसमें ग्रामीण भारत की बुनियादी सुविधाओं को विकसित कर गांव को आज की आवश्यकताओं के अनुरूप मुख्यधारा में तेजी से जोड़ने केलिए *वि बी *जी राम जी* योजना का निर्णय लिया।

कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार,लूट का केंद्र बन गया था।झारखंड ने तो लूट में मिसाल कायम किया। खूंटी जिले में 24 करोड़ के गबन उजागर होने पर कैसे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जेल जाना पड़ा यह आप जानते हैं। झारखंड के लगभग सभी जिलों में मनरेगा में घोटाले उजागर हुए हैं।

कहा कि वित्तीय वर्ष 2024..25 में मनरेगा योजना में 193.67 करोड़ रुपए का गबन दर्ज किया गया।इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025..26 में पश्चिम बंगाल के 19 जिलों सहित 23 राज्यों की निगरानी में कागजों पर ऐसे कार्य दिखाए गए जिसका जमीन पर अस्तित्व ही नहीं था।

कहा कि जितनी राशि का खर्च दिखाया गया था उतने कार्य नहीं पाए गए।साथ ही श्रम आधारित कार्यों में मशीनों का उपयोग बड़े पैमाने पर किया गया।

कहा कि करोना महामारी के बाद की अवधि /में केवल 7.61% परिवारों ने 100 दिन का रोजगार पूरा किया।मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में 11 वर्षों में बहुत प्रयास किए। जिसके कारण कुछ साकारात्मक परिणाम मिले।महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, सक्रिय श्रमिकों की संख्या 12.11 करोड़ पहुंच गई।
99% तक ई भुगतान के बावजूद डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं की गई।
पैसों का गबन होता रहा,काम धरातल पर नहीं उतरे।

कहा कि इसलिए नए अधिनियम की आवश्यकता पड़ीनया अधिनियम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ( ग्रामीण)यह अधिनियम 20 वर्ष पुराने मनरेगा का विकसित और बड़ा मॉडल है।यह विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने केलिए ग्रामीण श्रमिकों को पहले 100 दिन के बदले अब 125 दिन के कार्य दिवस की गारंटी देता है।

कहा कि इसमें मुख्यतः चार बिंदुओं पर फोकस किया गया हैइस अधिनियम में अनेक बिखरे हुए श्रेणियों की जगह चार श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।जिसमें जल संरक्षण जो आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है से संबंधित निर्माण , ग्रामीण बुनियादी संरचना का निर्माण जिसमें सड़कों का निर्माण शामिल है जो गांव को बाजार से जोड़ता है।वैसे निर्माण जिसमें रोजगार का सृजन होता है। इसमें भंडारण से संबंधित निर्माण कार्य शामिल हैं।औरबदलते पर्यावरण संकट की दृष्टि से निर्माण जिससे मौसमी प्रभाव को कम किया जा सके। जैसे मिट्टी के कटाव को रोकना, जल संरक्षण, बाढ़ से बचाव जैसे कार्य शामिल हैं।

कहा कि इस प्रकार यह अधिनियम अधिक रोजगार, पारदर्शिता, प्लानिंग और जवाबदेही को सुनिश्चित करता है।इस अधिनियम में….एआई आधारित धोखाधड़ी की पहचान की व्यवस्था की गई है।केंद्र और राज्य स्तरीय निगरानी समिति की व्यवस्था।जीपीएस मोबाइल आधारित निगरानी की व्यवस्था,साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण,प्रत्येक पंचायत में वर्ष में दो बार योजनाओं की सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है।

कहा कि इस अधिनियम में किसान और श्रमिक दोनों को लाभ की दृष्टि से ध्यान रखा गया है।वर्ष में 60 दिन नो वर्क अवधि। क्योंकि कृषि कार्य के समय मजदूर कृषि कार्य में शामिल रहते हैं।
कृषि कार्य में मजदूरों को मजदूरी भी ज्यादा मिलती है साथ ही किसानों को समय पर मजदूर भी मिल जाते हैं।
बाकी वर्ष के 300 दिन में 125 दिन काम की गारंटी दी गई है।
काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान किया गया है।इस अधिनियम के केंद्र और राज्य सरकार का अनुपात 60: 40 है।

कहा कि कांग्रेस गांव, गरीब किसान विरोधी पार्टी है।कांग्रेस को भ्रष्टाचार ,लूट रुकने से परेशानी हो रही है।

कहा कि मजदूरों को 100 की जगह 125 दिन काम मिलेगा इससे परेशानी हो रही है।काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा इससे परेशानी हो रही है।योजना में राम शब्द आ रहा है इससे परेशानी हो रही है।

कहा कि स्पष्ट है कांग्रेस अपनी पुरानी आदतों से उबर नहीं पा रही है।कांग्रेस को भ्रष्टाचार लूट पसंद है,तुष्टीकरण की राजनीति में डूबी कांग्रेस पार्टी को राम से नफरत है, पहले भी था,आज तक है।कांग्रेस के विरोध का जनता मुंह तोड़ जवाब देगी।
आज कांग्रेस अपनी नियत और नीति के कारण ही सत्ता से बाहर है।आगे भी रहेगी।

कहा कि भाजपा कार्यकर्ता जनता को नए अधिनियम की खूबियों को जनता के बीच लेकर जाएंगे। और कांग्रेस के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करेंगे। आगामी 8 से 10 जनवरी तक भाजपा कार्यकर्ता सभी मंडलों में जी राम जी योजना की विशेषताओं को बताएंगे। जनता को कांग्रेस पार्टी के दुष्प्रचार के खिलाफ जागरूक करेंगे।

प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक,प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा, रमाकांत महतो उपस्थित थे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पेसा नियमावली पर दी प्रतिक्रिया

भाजपा के सदन से सड़क तक संघर्ष की जीत …बाबूलाल मरांडी

5वीं अनुसूची की भावना के विपरीत होने पर भाजपा करेगी विरोध

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कैबिनेट से पारित पेसा नियमावली पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड कैबिनेट द्वारा पारित पेसा नियमावली का भारतीय जनता पार्टी स्वागत करती है। यह भाजपा के लंबे संघर्ष और दबाव का परिणाम है।भाजपा और एनडीए ने लगातार सड़क से सदन तक इसके लिए आवाज बुलंद किया।

भाजपा यह मानती है कि कैबिनेट से पारित नियमावली पारंपरिक रूढ़ि व्यवस्था पर आधारित होगी जिसकी मांग की जा रही थी परंतु अगर इसमें संविधान की 5वीं अनुसूची से जुड़ी भावना के विपरीत थोड़े भी परिवर्तन किए गए होंगे तो पार्टी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

पार्टी महामहिम राज्यपाल से भी इस संदर्भ में ध्यान आकृष्ट कराएगी ताकि कानून बनाने के पहले यह पारंपरिक रूढ़ि व्यवस्था का आधार सुनिश्चित हो।

अनुसूचित जाति (एससी ) दलित समाज को उनके हक से वंचित कर रही है हेमंत सरकार : अमर कुमार बाउरी

नगर निकाय चुनाव में एससी के कोटा को कम कर एससी समाज के साथ हेमंत सरकार ने किया विश्वासघात।

राँची नगर निगम में एससी के लिए मात्र 2 सीट, एससी समाज के साथ अन्याय।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जल–जंगल–जमीन, झारखंड और झारखंडवासियों के नाम पर सत्ता में आई यह सरकार अपने ही वादों से भटक गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लगातार सरकार की खामियों को उजागर करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आज झारखंड में अनुसूचित जाति (एससी) समाज की स्थिति दयनीय बनी हुई है।

अमर कुमार बाउरी ने बताया कि सरकार के एक मंत्री ने स्वयं एससी की स्थिति सुधारने को लेकर सरकार को लिखित आग्रह किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि हालात कितने गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा एक नई योजना की शुरुआत की गई है, जबकि एससी बच्चों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेजने की मांग बहुत पहले से की जा रही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में लगभग 50 लाख एससी आबादी को उनके हक और अधिकार से वंचित रखा जा रहा है और सरकार की योजनाओं में एससी समाज का नामोनिशान तक नहीं है।

नगर निगम और नगर पंचायत चुनावों के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि न्यायालय के माध्यम से चुनाव कराना तय हुआ है। पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की मांग भी न्यायालय से ही की गई थी, लेकिन सरकार ने डोर तो डोर जाकर निरीक्षण किए बिना मतदाता सूची के आधार पर ओबीसी आरक्षण लागू कर दिया, जो पूरी तरह से ओबीसी के साथ भी अन्याय किया गया।

रांची नगर निगम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे नगर निगम में केवल दो वार्डों में ही एससी को आरक्षण मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से एक वर्ग को दबाने का कार्य कर रही है और अलग-अलग नगर निगमों में अलग-अलग नियम लागू कर रही है।

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि झारखंड सरकार एससी समाज के संगठित ताकत को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्यायालय के दबाव में आनन-फानन में चुनाव की तैयारी कर रही है। लेकिन दलित समाज की भागीदारी कम कर बाबा साहेब के संविधान की भी अवमानना कर रही है।

उन्होंने मांग की कि हेमंत सोरेन सरकार नगर निगम चुनावों में पूर्ण पारदर्शिता लाए, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि जब सामाजिक संगठन पदाधिकारियों से बात करते हैं तो उन्हें सरकार का हवाला दिया जाता है, जिससे एससी समाज को अपने हक और अधिकार के लिए बार-बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। यदि सरकार अपनी कमियों को दूर नहीं करती है तो आने वाले समय में दलित समाज बाबा साहेब अंबेडकर के संविधानिक कानूनों के तहत आंदोलन करने को मजबूर होगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक मान्यताओं को तोड़ते हुए अब तक बाल आयोग, महिला आयोग, एससी आयोग और सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण आयोगों का गठन नहीं कर पाई है।

प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अशोक बड़ाईक एवं भाजपा एससी मोर्चा आईटी सेल प्रभारी गोविंदा बाल्मिकी भी उपस्थित थे।

शराब घोटाले में आईएएस ऑफिसर विनय चौबे के साथ सीएम हेमंत सोरेन भी शामिल…..बाबूलाल मरांडी

मुख्यमंत्री को बचाने केलिए एसीबी की हो रही सारी कवायद

मुख्यमंत्री पाक साफ तो सीबीआई जांच की करें अनुशंसा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज शराब घोटाले की चल रही एसीबी जांच के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बड़ा निशाना साधा।

श्री मरांडी ने प्रेसवार्ता में सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में हुए शराब घोटाले में आईएएस अधिकारी विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हैं।

कहा कि शराब घोटाले में एसीबी जांच चल रही है।और इस मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे जेल में बंद हैं। एसीबी जांच में उत्पाद आयुक्तों अमित कुमार, कर्ण सत्यार्थी,फैज अहमद से हो रही पूछताछ में लगभग एक जैसे बयान मीडिया में छप रहे हैं। अमित कुमार ने कहा कि जो विनय चौबे ने चाहा वही हुआ, कर्ण सत्यार्थी ने कहा है कि विनय चौबे ने मामले में केस दर्ज करने से मना किया था।

श्री मरांडी ने कहा कि ऐसे बयान कोई सामान्य नहीं बल्कि बड़े और गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता हुआ बयान है।

उन्होंने कहा कि एसीबी के द्वारा इस प्रकार चल रही पूछताछ बड़े लोगों को बचाने की सुनियोजित साजिश है।

कहा कि जिनके बयान की चर्चा हुई वे सभी आईएएस अधिकारी हैं। इनको यदि सचिव दबाव डालकर नियम विरुद्ध काम करा रहे थे फाइल में नोटिंग करते,मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करते कि गलत हो रहा है,उनपर अनुचित दबाव डाला जा रहा है,शराब के ठेके में चहेतों को लाभ पहुंचाने केलिए कहा जा रहा है।

कहा कि यहां पर यह स्वाभाविक सवाल खड़ा होता है,और जांच का नया विषय भी बनता है।

कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इनलोगों ने फाइल में अनुचित दबाव का नोटिंग क्यों नहीं किया, सीएस,सीएम से मिलकर क्यों शिकायत नहीं की? और अगर किया तो फिर क्या उत्तर मिला?

कहा कि इन लोगों के बयान से यही झलक रहा कि ये रटे रटाए तोते की तरह बोल रहे।इन लोगों को अदालत में भी ऐसा ही बोलने का निर्देश है।क्योंकि बड़े लोगों को बचाना है।

कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को संभावित शराब घोटाले को लेकर वर्ष 2022 में ही पत्र लिखकर आगाह किया था।लेकिन सीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की।इससे स्पष्ट है कि विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी घोटाले में शामिल हैं। और सीएम को बचाने की कवायद सरकारी ऑफिसर कर रहे।

कहा कि एसीबी वाले जांच की नौटंकी कर रहे।एसीबी डीजीपी पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप हैं। फिर इनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद पाक साफ हैं तो पूरे मामले को सीबीआई को सौंप दें।

श्री मरांडी ने कहा कि जिन पूर्व आयुक्तों से पूछताछ हुई है वे सभी आज जिलों में उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित हैं।

कहा कि सवाल यह उठता है कि जो पदाधिकारी दबाव में काम करते हैं,भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं,कार्यपालिका नियमावली का पालन नहीं करते फिर वे उपायुक्त के रूप में कितना ईमानदारी से काम करेंगे। इनकी पोस्टिंग और इनके बयान में तो तालमेल नहीं बैठता।एक तरफ ऐसे पदाधिकारी दबाव में काम करते हैं,नियम विरुद्ध काम करते हैं,दूसरी ओर इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेवारी भी सौंपी गई है। ऐसे लोगों को तो हटाया जाना चाहिए।

प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

नेशनल हेराल्ड मामले में अनर्गल प्रलाप कर रही कांग्रेस पार्टी…बाबूलाल मरांडी

राउज एवेन्यू कोर्ट ने नहीं दिया है क्लीन चिट, मामले को माना विचाराधीन,ट्रायल रहेगा जारी

भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान मूकदर्शक रही पुलिस, पुलिस प्रशासन बन गया है राज्य सरकार का टूल किट

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज नेशनल हेराल्ड मामले में प्रदेश कांग्रेस के प्रदर्शन को कांग्रेस पार्टी का मानसिक दिवालिया पन करार दिया।

श्री मरांडी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मामले में अनर्गल प्रलाप कर भ्रष्टाचार को छुपाना चाहती है।जबकि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार की जननी, पोषक और संरक्षक है।

कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में राउज कोर्ट का फैसला कहीं से भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी को क्लीन चिट नहीं है।इस फैसले ने सिर्फ एफआईआर दर्ज नहीं होने की बात कही है और मामले को विचाराधीन करार देते हुए ट्रायल को जारी रखने की बात भी कही है

कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला शुद्ध रूप से धोखाधड़ी का मामला है जिसमें धारा 420 के तहत सात साल की सजा है।

कहा कि इसके पहले भी कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं जहां इन्हें कोई राहत नहीं मिली। दोनों अदालतों ने मामले को प्रथम दृष्ट्या गंभीर मानते हुए खारिज करने से इनकार कर दिया है। और कहा कि इसे निरस्त करने का कोई औचित्य भी नहीं बनता।

कांग्रेस पार्टी द्वारा इसे राग द्वेष से जुड़ा मामला बताए जाने को भी कोर्ट ने निरस्त किया।

श्री मरांडी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भीतर से खोखली हो चुकी है। संवैधानिक मर्यादाओं के तहत काम करने की राजनीतिक क्षमता कांग्रेस के पास नहीं बची है।

कहा कि नेशनल हेराल्ड की इमारत निर्विवाद रूप से दिल्ली की एक प्रमुख संपत्ति है जिसे व्यावसायिक केलिए लीज पर दिया गया है।

कहा कि यह 2000करोड़ की संपत्ति को हड़पने का मामला है जो खत्म नहीं हुआ है।कानून की नजर में दोषी बक्से नहीं जाएंगे।

कहा कि यही कांग्रेस पार्टी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर न्यायालय का विरोध करती है और आज राउज कोर्ट के फैसले पर जनता को दिग्भ्रमित कर रही है।

श्री मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक सामाजिक संगठन को धरना प्रदर्शन का अधिकर है लेकिन जिस प्रकार से आज पुलिस प्रशासन के संरक्षण में कांग्रेस के नेताओं ने जिसमें कई संवैधानिक दायित्वों से भी जुड़े हैं ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के गेट तक पहुंच कर प्रदर्शन किया इससे स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन राज्य सरकार का टूल किट बन गया है।

कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने संयम बरता नहीं तो प्रतिक्रिया में कोई भी बड़ी घटना घट सकती थी।

कहा कि आखिर प्रशासन द्वारा बैरिकेटिंग किए जाने के बाद भी कांग्रेस के लोगों को भाजपा प्रदेश कार्यालय के गेट तक किसके इशारे पर पहुंचने दिया गया।

श्री मरांडी ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की ।कहा कि राज्य सरकार ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करे।

कांग्रेस पार्टी देश की ओरिजिनल वोट चोर पार्टी है—प्रतुल शाहदेव

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का नहीं, बल्कि वोट चोरी और संस्थाओं के दुरुपयोग का रहा है। आज जब भी भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतती है, कांग्रेस और उसका पूरा विपक्ष चुनाव आयोग, ईवीएम और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला शुरू कर देता है, लेकिन जब वही विपक्ष चुनाव जीत जाता है तो उसे लोकतंत्र की जीत बताने में देर नहीं लगती।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि आज़ादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया ही कांग्रेस की वोट-चोरी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है। प्रधानमंत्री बनने के लिए कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्षों के मतदान में सरदार वल्लभभाई पटेल को 28 वोट मिले थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू को मात्र 2 वोट। इसके बावजूद लोकतांत्रिक निर्णय को दरकिनार कर नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया गया। इससे बड़ा वोट चोरी और जनमत की अवहेलना का उदाहरण देश के इतिहास में नहीं हो सकता।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया, क्योंकि न्यायालय ने पाया कि चुनाव नियमों के अनुरूप नहीं हुआ था। यह भी वोट चोरी का ही एक रूप था।

1975 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल थोपना लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। 1976 में होने वाले आम चुनाव में जनता को वोट देने का संवैधानिक अधिकार था, लेकिन आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने यह अधिकार जनता से छीन लिया। यह सीधे-सीधे जनता के वोट की चोरी थी।प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सोनिया गांधी का नागरिक बने बिना मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी वोट चोरी का ही एक उदाहरण है, जिसे कांग्रेस ने हमेशा की तरह सत्ता के प्रभाव से दबाने की कोशिश की।

  • ईवीएम में खोट होता तो विपक्ष ने 2014 के बाद के 74 विधानसभा चुनाव में 30 कैसे जीत लिया

प्रतुल शाहदेव ने ईवीएम विवाद पर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश में 74 बड़े विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 44 में एनडीए को जीत मिली और 30 में विपक्ष ने जीत हासिल की। अगर ईवीएम में खोट होती, तो विपक्ष इन 30 चुनावों में कैसे जीतता? सच यह है कि विपक्ष हारने पर बहाने ढूंढती है और जीतने पर चुप्पी साध लेती है।

रिम्स कैंपस में अवैध निर्माण: भाजपा ने सरकार, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा किया

रिम्स–2 की जमीन भी इसी मॉडल पर हड़पने की तैयारी: अजय साह

रिम्स अस्पताल परिसर में चल रहे अवैध निर्माण को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि राजधानी रांची में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर ज़मीन की व्यवस्थित और संगठित लूट जारी है। बरियातू की जिस जमीन पर सेना का दावा था, उसे हथियाने वाले पूर्व डीसी, जो इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं, को सरकार ने दोबारा सत्ता तंत्र में शामिल कर लिया है। अब उसी बरियातू क्षेत्र में सरकारी अस्पताल की जमीन पर कब्ज़ा कर एक निजी अपार्टमेंट का निर्माण खड़ा कर दिया गया है, जो अपने-आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है।

अजय ने आगे कहा कि सामान्यतः ज़मीन माफिया दो–तीन दिनों में अवैध कब्ज़ा कर भाग खड़े होते हैं, लेकिन रिम्स परिसर में तो चार वर्षों तक खुलेआम एक निजी अपार्टमेंट का निर्माण होता रहा। इतने लंबे समय तक चलने वाला अवैध निर्माण तभी संभव है जब माफियाओं को सरकार और उसके प्रभावी तंत्र का संरक्षण प्राप्त हो। इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के साथ–साथ रांची नगर निगम के शीर्ष अधिकारी भी समान रूप से संलिप्त प्रतीत होते हैं। जहाँ आम लोगों के साधारण मकानों के नक्शे वर्षों तक पास नहीं होते, वहाँ चार साल तक अवैध अपार्टमेंट का निर्माण बिना अधिकारियों की शह के चलना असंभव है।

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि रांची नगर निगम पूरे राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों की शरणस्थली बन गया है। दूसरे जिलों या नगर परिषदों में जब कोई अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर जाता है, तो उसे रांची नगर निगम में पदोन्नत कर भेज दिया जाता है, ताकि वह राजधानी में बड़े पैमाने पर “खेल” कर सके। अजय ने कहा कि नगर निगम में जारी यही भ्रष्टाचार का तंत्र है जिसके कारण पिछले पाँच वर्षों से राज्य में नगर निगम चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं।

अजय साह ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इसी “रिम्स मॉडल” को लागू करने के लिए सरकार भारी जनविरोध के बावजूद रिम्स–2 के लिए निवासियों की जमीन अधिग्रहित करने पर तुली हुई है? जब वर्तमान रिम्स की जमीन बिल्डरों और जमीन माफियाओं के हवाले कर दी गई है, तो क्या रिम्स–2 भी इसी तरह भूमाफियाओं के लिए नया खजाना बनाने की तैयारी है?

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि जो नगर निगम आम नागरिकों के साधारण मकानों पर बुलडोज़र चलाने में तत्पर रहता है, वही रिम्स में हो रहे अवैध निर्माण पर वर्षों तक केवल “नोटिस–नोटिस” का खेल खेलता रहा। भाजपा ने दावा किया कि इस अवैध निर्माण में कांग्रेस के एक विधायक का नाम भी सामने आ रहा है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।

नाम के शब्दों से भावनात्मक लगाव बढ़ता है….बाबूलाल मरांडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी तंत्र और भवनों को जनता से जोड़ने केलिए किया पहल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज भवन का नाम लोक भवन करने के लिए प्रधानमंत्री जी का एवं निर्णय को झारखंड में अविलंब लागू करने पर बधाई शुभकामनाएं दी।

श्री मरांडी ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता को शासक बोध से हटाकर लोक सेवा के रूप में स्थापित करने की लगातार पहल की है।

कहा कि चाहे मंत्री गण ,वरीय पदाधिकारियों के गाड़ियों से लाल पीली बत्ती हटाने का निर्णय हो या फिर राज पथ को कर्तव्य पथ बनाना,प्रधानमंत्री आवास को लोक कल्याण मार्ग ,केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन,राजभवन को लोक भवन और पीएमओ को सेवा तीर्थ के रूप में नामांकित करना जैसे निर्णय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने खुद को प्रधानमंत्री की जगह प्रधान सेवक कहलाना तय किया है।

कहा कि इतना ही नहीं विकलांग शब्द को हटाकर दिव्यांग कहना यह बताता है कि प्रधानमंत्री जी भारत के एक एक नागरिक की भावनाओं के कितने करीब हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि ये शब्दों का परिवर्तन मात्र नहीं बल्कि मोदी सरकार की नीति और नीयत को दर्शाता है।

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