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श्री नीरज सिंह

प्रदेश सह मीडिया प्रभारी 

श्री सूरज नाथ शाहदेव

प्रदेश सह मीडिया प्रभारी 

श्री प्रतुल शाहदेव 

मुख्य प्रवक्ता 

जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं : बाबूलाल मरांडी

आलमगीर आलम के जेल से बाहर आने पर ऐसे जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो

भ्रष्टाचार के मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता, लालू यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर का उदाहरण है सामने

सोशल मीडिया के एक्स पर नेता प्रतिपक्ष ने किया पोस्ट

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आलमगीर आलम को बेल मिलने और इसपर कांग्रेसियों द्वारा मनाए जा रहे जश्न पर को लेकर सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि यह केवल उम्र और बीमारी के आधार पर कड़ी शर्तों के साथ मिली अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं।

उन्होंने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद आज बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार से जमानत पर बाहर आने का मौका मिला। लेकिन इसे “बाइज्जत बरी” होना समझने की भूल कोई न करे।

श्री मरांडी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उनके समर्थक और लाभार्थी जमानत पर ऐसे जश्न मना रहे हैं मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं, पटाखे फोड़े जा रहे हैं, आतिशबाज़ी हो रही है। क्या करोड़ों रुपये की कथित काली कमाई, कमीशनखोरी और गरीबों के हिस्से पर डाका डालने के आरोप अब उत्सव मनाने लायक उपलब्धि बन चुके हैं?

उन्होंने कहा कि जिस मामले में मंत्री के निजी सचिव के घरेलू सहायक के घर से करीब ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए हों, वहाँ जनता सवाल पूछेगी ही। आखिर एक घरेलू सहायक के घर में नोटों का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं। पूरा देश टीवी पर वह दृश्य देख रहा था और झारखंड शर्म से सिर झुकाए खड़ा था।

साथ ही श्री मरांडी ने कहा कि याद रखिए, जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। मुकदमा अभी बाकी है, अदालतें अभी बाकी हैं और कानून की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी। सत्ता, संपर्क और संसाधनों के दम पर कुछ समय की राहत तो मिल सकती है, लेकिन ऐसे मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता। अगर भरोसा न हो तो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर को देख लीजिए। सत्ता गई, उम्र ढली, स्वास्थ्य बिगड़ा, लेकिन पुराने मामलों की परछाई आज भी पीछा नहीं छोड़ रही। भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की दस्तक देर से जरूर आती है, पर आती जरूर है।

कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म नहीं बल्कि जश्न का उत्सव-प्रतुल शाह देव

पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को बेल मिलने पर पटाखा फोड़ना और नाचना दुर्भाग्यपूर्ण

कमीशन,करप्शन और कलेक्शन के मूल मंत्र पर चल रही है सरकार

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि ₹3000 करोड़ के बहुचर्चित टेंडर घोटाले के मुख्य अभियुक्त पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा पटाखे फोड़ना, नाच-गाना करना और उत्सव मनाना झारखंड की राजनीति के नैतिक पतन का सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और उनके सहयोगियों ने जिस प्रकार “बेल उत्सव” मनाया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार शर्म का नहीं बल्कि जश्न का विषय बन चुका है।प्रतुल ने कहा कि जिस व्यक्ति के निजी सचिव के सहायक के यहां से ईडी की छापेमारी में ₹32 करोड़ से अधिक नकद बरामद हुआ, जिस मामले में उस सहायक जहांगीर आलम ने स्वयं स्वीकार किया कि पैसा आलमगीर आलम का है, उस मामले में बेल मिलने पर कांग्रेसियों का नाचना पूरे राज्य की जनता का अपमान है। बेल को कांग्रेस “बाइज्जत बरी” की तरह प्रस्तुत कर रही है, जबकि देश की जनता जानती है कि बेल न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, भ्रष्टाचार मुक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं।

प्रतुल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की सरकार ने शायद नया नारा बना लिया है —’जहां घोटाला, वहां शर्म नहीं बल्कि जश्न मनेगा’।प्रतुल ने कहा कि आज झारखंड की स्थिति यह है कि गांवों में पेयजल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। कई जलमीनार शोपीस बन चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग की हालत इतनी बदतर है कि जिला अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और उपकरणों का भारी अभाव है। मरीज रेफर होकर दर-दर भटक रहे हैं।उन्होंने कहा कि राज्य में सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, बेरोजगार युवा निराश हैं, लेकिन कांग्रेस और झामुमो के नेताओं को जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं। उन्हें केवल घोटालेबाज नेताओं के स्वागत और बचाव में ऊर्जा दिखाई देती है।प्रतुल ने कहा कि जिस राज्य में किसान परेशान हो, युवा नौकरी के लिए पलायन कर रहे हों, महिलाएं असुरक्षित हों और विकास योजनाओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा हो, वहां सत्ता पक्ष द्वारा “भ्रष्टाचार उत्सव” मनाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

राहुल गांधी स्पष्ट करें कि क्या उनके युग में भ्रष्टाचार को उपलब्धि माना जाता है?

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो ₹3000 करोड़ के टेंडर घोटाले को “उपलब्धि” मानती है? क्या उनके युग में कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति है कि जनता के पैसे की लूट पर जश्न मनाया जाए?प्रतुल ने कहा कि झारखंड की जनता सब देख रही है। जनता को अब समझ में आ चुका है कि यह गठबंधन सरकार विकास नहीं, “कमीशन, करप्शन और कलेक्शन” के मॉडल पर चल रही है। आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस भ्रष्ट और संवेदनहीन राजनीति का जवाब देगी। आज की प्रेस वार्ता में झारखंड प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी श्री योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

झामुमो के पत्र पर भाजपा का पलटवार

प्रधानमंत्री जी राष्ट्रहित में दिन-रात कार्य कर रहे हैं, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं – प्रतुल शाह देव

हेमंत सोरेन जब झारखंड की जनता के टैक्स के पैसे से असम, बंगाल और अन्य राज्यों की राजनीतिक यात्राएं करते हैं, तब क्या वह “राष्ट्रहित” होता है?

जो मुख्यमंत्री आदिवासी मूलवासी के गाढ़ी कमाई से 100 करोड़ का शीश महल बना रहे हो,उसकी पार्टी को प्रश्न करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के पत्र पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा लगता है झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रधानमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ करना चाह रहा है। वैसे भी प्रधानमंत्री देश के अस्मिता और गौरव के प्रतीक होते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की विदेश यात्राओं का उद्देश्य भारत के लिए निवेश, कूटनीतिक मजबूती, रोजगार और वैश्विक सम्मान सुनिश्चित करना है, जबकि हेमंत सरकार की यात्राओं का उद्देश्य केवल सत्ता बचाना और परिवारवादी राजनीति को मजबूत करना दिखाई देता है। प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद के लिए 100 करोड़ का शीश महल रूपी मुख्यमंत्री आवास बना रहे हैं। यह देश के सबसे महंगे और खर्चीले विलासिता के सुविधा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री आवास में एक होगा।

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री की बाहरी राज्यों की राजनीतिक यात्राओं का खर्च सरकारी खजाने से उठाया जा रहा। झारखंड की बदहाल कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, बिजली संकट और भ्रष्टाचार छोड़कर दूसरे राज्यों में राजनीति करना जनता के हित में है?प्रतुल ने जानना चाहा कि क्या मुख्यमंत्री जी ने कभी झारखंड के किसानों, युवाओं और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उतनी गंभीरता दिखाई, जितनी विपक्षी गठबंधन की राजनीति के लिए दिखाते हैं?जब राज्य में विकास योजनाएं ठप हैं, निवेश भाग रहा है और अपराध चरम पर है, तब मुख्यमंत्री जी का लगातार राजनीतिक पर्यटन यात्राएं का क्या औचित्य है?
प्रतुल ने कहा कि झामुमो को यह समझना चाहिए कि राज्य के खजाने पर बोझ डालकर राजनीतिक यात्राएं करने वालों को राष्ट्रहित पर भाषण देने का नैतिक अधिकार नहीं है।

पानी बिजली संकट पर रांची में भाजपा का घड़ा फोड़ आक्रोश प्रदर्शन कार्यक्रम

पानी-बिजली देने की बजाय झारखंड सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई को चुनाव प्रचार में खर्च किया : आदित्य साहू

भाजपा नेताओं ने हेमंत सरकार पर जमकर साधा निशाना

जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर झारखंड ठप्प करने की चेतावनी

झारखंड में अगली सरकार बीजेपी के नेतृत्व में बननी तय : आदित्य साहू

पूरा झारखंड वर्तमान में पानी और बिजली की भीषण संकट से त्राहिमाम कर रहा है। राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में पानी– बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इसी ज्वलंत मुद्दे को लेकर झारखंड भाजपा के महिला पुरुष कार्यकर्ता पिछले सप्ताह भर से राज्य के विभिन्न जिलों में माथे पर मटकी लेकर जोरदार आक्रोश प्रदर्शन कर राज्य सरकार को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने को लेकर आंदोलनरत है। इसी क्रम में आज राजधानी रांची में भाजपा रांची जिला के संयुक्त तत्वावधान में बिजली-पानी संकट को लेकर जिला स्कूल मैदान शहीद चौक से जिला समाहरणालय तक घड़ा फोड़ आक्रोश प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जिला समाहरणालय का घेराव कर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में रांची महानगर, रांची पूर्वी एवं रांची पश्चिमी जिलों के हजारों की संख्या में महिला पुरुष कार्यकर्ता शामिल हुए और सड़कों पर हेमंत सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, रांची विधायक सीपी सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडेय आदि मौजूद थे।

इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में भीषण जल संकट और लगातार हो रही बिजली कटौती से आम जनता का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जिसके चलते लोगों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। भाजपा सदैव जनता के हक, अधिकार और मूलभूत सुविधाओं की लड़ाई मजबूती से लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।

श्री साहू ने चेतावनी दिया कि जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर भाजपा का यह आंदोलन और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर हजारों हजार की संख्या में सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ता झारखंड ठप्प कराने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता देवता होती है जो गद्दी पर बैठाना जानती है तो वह गद्दी से कान पकड़कर उतारना भी जानती है।

श्री साहू ने कहा कि आज काफी गर्मी के बावजूद सड़कों पर उतरी यह भारी भीड़, राज्य सरकार के नाकामियों के प्रति जनाक्रोश का प्रतीक है। आज लोगों का गुस्सा और आक्रोश रांची की सड़कों पर दिखा।

श्री साहू ने कहा कि सरकार के लोग एसी में बैठ कर जनता की परेशानी का मजा उठा रहे हैं। लगता है कि सरकार और प्रशासन के कान की जाली फट चुकी है, इसलिए जनता की आवाज इन तक नहीं पहुंच रही है। लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जो जनता सड़कों पर चिल्ला रही है इन लोगों के घरों में घुसकर उनकी कान की जाली लगाने का काम भी करेगी। इस बेरहम सरकार को जनता की आवाज को सुनना ही पड़ेगा। झारखंड ही एक ऐसा राज्य है जहां इस राज्य की जनता की गाढ़ी कमाई से एक इंजीनियर का बेटा हिमालया के पानी से स्नान करता है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड की जनता की गाढ़ी कमाई को हेमंत सरकार ने पूरी कैबिनेट के साथ बंगाल और असम राज्य में चुनाव के दौरान उड़ाने का काम किया है। जिन पैसे से जनता को पानी बिजली देना था झारखंड सरकार ने उस पैसे को चुनाव प्रचार में खर्च किया।

श्री साहू ने आश्वस्त किया कि झारखंड में जब भी अब विधानसभा चुनाव होगा, कांग्रेस, राजद और jmm को मुंह की खानी पड़ेगी। बीजेपी के नेतृत्व में इस राज्य में अगली सरकार बननी तय है।

श्री साहू ने कहा कि बीजेपी सेवा भाव से काम करती है। बीजेपी झारखंड के करोड़ों नागरिकों की परेशानी को यूं ही नहीं देख सकती है। इसी कारण राज्य भर के जिलों में बीजेपी कार्यकर्ता और महिलाएं माथे पर घड़ा लेकर इस चिलचिलाती धूप में प्रदर्शन कर सरकार को जगाने का काम कर रही है।

श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना झारखंड में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जिस पैसे से घर-घर में पीने का पानी पहुंचाने की योजना थी उसे यह सरकार डकार चुकी है। हजारों करोड़ रुपए बैंक में भी पड़े हुए हैं लेकिन नल से जल योजना पहुंचाने की इच्छा शक्ति सरकार में कतई नहीं है। नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी सभी वर्ग की चिंता करते हैं जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस के समर्थन से चल रही है झारखंड सरकार नरेंद्र मोदी द्वारा भेजे गए पैसे की बंदरबांट में लगी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि केवल रांची ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में पानी और बिजली की भारी दुर्दशा है। भारत सरकार ने ₹5000 करोड़ से अधिक की राशि नल से जल योजना के लिए देने का काम किया लेकिन घोटालेबाजों द्वारा सारे पैसे खा लिए गये। झारखंड सरकार घोटालेबाजों की सरकार है। यहां बिजली की भारी किल्लत है, पूरी अराजकता फैली हुई है। राज्यभर में किसान, मजदूर, आम नागरिक पूरी तरह त्रस्त हैं। यह सरकार सभी का दोहन कर रही है। आज का यह आंदोलन सांकेतिक हैं, सुधार नहीं किया गया तो जनता सर फोड़ना भी जानती है। जब तक समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि संघर्ष के रास्ते पर चलकर पश्चिम बंगाल की तरह झारखंड सरकार को भी उखाड़ फेंका जाएगा।

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में पानी और बिजली की गंभीर समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन का इस ओर कोई ठोस ध्यान नहीं है। आम जनता बिजली-पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए परेशान है और सरकार केवल तमाशबीन बनी हुई है।
जनता को राहत देने के बजाय राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से लगातार मुंह मोड़ रही है। भाजपा जनता की आवाज बनकर इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और हर घर तक पानी पहुंचाने और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

श्री सेठ ने कहा कि इस सरकार ने जनता को केवल मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने का काम किया है। इस सरकार के सारे वादे फिसड्डी साबित हुए। झारखंड का शासन-प्रशासन केंद्र की मोदी सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जा रही राशि का समुचित उपयोग करने में भी पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। यही कारण है कि महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन जैसी कई योजना झारखंड में फ्लॉप होने की कगार पर पहुंच गई है।

इसके अलावा कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडेय, विधायक सीपी सिंह, महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, रांची पूर्वी जिला अध्यक्ष विनय महतो, रांची पश्चिमी जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, आरती सिंह, शशांक राज, आरती कुजूर, काजल प्रधान, कमाल खान, सुबोध सिंह गुड्डू, सूरज चौरसिया,प्रतुल शाहदेव ,सत्य नारायण सिंह, मनोज मिश्रा, के. के गुप्ता, सुरेंद्र महतो, बलराम सिंह, जितेंद्र वर्मा, मनोज चौधरी, सत्यदेव मुंडा, सुधाकर चौबे, राकेश भास्कर, संदीप वर्मा, शोभा यादव, कृपाशंकर सिंह, संजय जयसवाल, ललित ओझा, सीमा सिंह,अरुण झा, सुनील साहू, राजू सिंह, वीणा मिश्रा, संकेत तिवारी, रेखा महतो, अर्चना सिंह, विनय राज, हरेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह,दिलीप सेठ, माधुरी देवी,अनुराधा मुंडा,रणधीर चौधरी, रामकुमार दुबे, विंध्याचल महतो ,सुषमा देवी, शत्रुघ्न साहू, चूड़ामणि महतो, संजीत सिंह, गोपाल महतो, अणिमा लकड़ा, पायल सोनी सहित सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अमूमन अपराधियों का पुलिस करती है पर्दाफाश, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर पुलिस का खोल रहे हैं कच्चा चिट्ठा : बाबूलाल मरांडी

धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दोनों पक्षों में मानो यह होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा

नेता प्रतिपक्ष ने प्रिंस खान के वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो को लेकर हेमंत सरकार को फिर घेरा

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने
कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के मीडिया में वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो को लेकर फिर से हेमंत सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा है कि आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का “मूल्यांकन” भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

श्री मरांडी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के।

श्री मरांडी ने आगे लिखा है कि सबसे भयावह पक्ष ‘सत्ता संरक्षण’ की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की ‘बोली’ लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” की तरह काम कर रही है?

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा है कि यदि वसूली की मानसिकता वाली यह कार्यशैली जारी रही, तो झारखंड ‘जंगलराज’ से भी बदतर स्थिति में पहुँच जाएगा। जब रक्षक ही भय का कारण बन जाएं, तो लोकतंत्र खतरे में है। जनता अब पूछ रही है—आखिर कब तक चलेगा यह “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” देने का धंधा?

महंगाई पर झामुमो का आंदोलन केवल और केवल राजनीतिक नौटंकी : आदित्य साहू

विश्व भर में महंगाई की ब्रांड एंबेसेडर के रूप में विख्यात रही कांग्रेस के साथ गलबहियां कर सरकार चलाने वाली jmm को महंगाई पर बोलने का हक नहीं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने महंगाई पर सत्तारूढ़ दल झामुमो के आंदोलन को राजनीतिक नौटंकी बतलाया है। उन्होंने कहा कि दरअसल भाजपा द्वारा प्रदेश में जनमुद्दों पर अनवरत आंदोलन से सत्तारूढ़ दल हताशा में है। झामुमो का यह आंदोलन हर मुद्दे पर अपनी पार्टी की विफलता को छुपाने और राज्य में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने का नाकाम प्रयास भर है। विश्व भर में महंगाई की ब्रांड एंबेसेडर के रूप में विख्यात रही कांग्रेस के साथ गलबहियां कर यहां सरकार चलाने वाली jmm को महंगाई पर तो कम से कम बोलने का रत्ती भर भी हक नहीं है। झामुमो केवल और केवल राजनीतिक ड्रामा कर रही है।

श्री साहू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में पेट्रोल डीजल पर कई बार उत्पाद शुल्क कम किया गया। वैश्विक भारी उथल पुथल जैसे हालातों के बीच जब पूरी दुनिया चिंतित थी, तब केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाकर देशवासियों को बड़ी राहत देने का काम किया गया। Jmm आम लोगों की बहुत हितकर है तो पेट्रोल डीजल पर वैट क्यों नहीं घटाती ? आज झारखंड में बिजली दर में वृद्धि के कारण उद्योग धंधे बंदी के कगार पर हैं। आम लोग महंगी बिजली बिल से परेशान हैं। यह सब jmm को नहीं दिखता।

श्री साहू ने कहा कि आज वैश्विक संकट के कारण पूरा विश्व ही परेशान है। यह सभी जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में अवरोध के कारण कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगी हुई है। यह सिर्फ भारत में ही तो महंगा नहीं हुआ है। इस विपरीत परिस्थिति में भी केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह नियंत्रित रखने का काम किया है। पूरी दुनिया में आज ऊर्जा संकट किसी से छिपा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों से अपने व्यक्तिगत संबंधों और सूझबूझ से भारत की जनता को पूरी राहत देने की जो कोशिश की है, वह सराहनीय है। दूसरी तरफ झारखंड सरकार महंगाई पर केवल बयानबाजी और राजनीति कर रही है। इन्हीं दलों ने चुनाव पूर्व 450 रुपए में आम लोगों को गैस सिलेंडर देने का वादा किया था। इन्हें 450 रुपए में आम लोगों को गैस सिलेंडर मुहैया कराने से किसने रोका है ?Jmm और कांग्रेस वाले केवल राजनीतिक ड्रामा नहीं करें और जनहित के जो मुद्दे भाजपा सिलसिलेवार तरीके से उठा रही है, इस के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करें। जनता इन दलों के चेहरे को अच्छी तरह पहचानती है।

भाजपा कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी करार देने वालों दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ बाबूलाल ने एक्स पर लिखकर दिखाया आईना

वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला

फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार से भी उनके कदम नहीं डगमगाए

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के ‘लहू’ से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का ‘गिफ्ट’ है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में “लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह ‘गिफ्ट’ नहीं, शहीदों का बलिदान है!” पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने “लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने” वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के ‘खूनी खेल’ की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक “चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी” में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक “15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर” में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।
2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी ‘तेरहवीं’ पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह ‘गिफ्ट’ नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे “चुनाव आयोग की सेटिंग” कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे ‘मेहरबानी’ कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के ‘बलिदान’ की जीत है!

गोड्डा में आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की प्रसूता की मौत पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को घेरा

कहा

यह एक प्रसूता की मौत नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम की मौत : आदित्य साहू

मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र का जब यह हाल तो प्रदेश के अन्य इलाकों में कुव्यवस्था का लगाया जा सकता है सहज अंदाजा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गोड्डा जिला अंतर्गत कुसुमघाटी निवासी आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की मीरा मालतो नामक प्रसूता की समुचित स्वास्थ्य व्यवस्था के अभाव में मौत पर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह एक प्रसूता की मौत नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम की मौत है। सबसे दुखद है कि यह मामला राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट से जुड़ा हुआ है। जब मुख्यमंत्री के निर्वाचन विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल है तो पूरे राज्य में इस विभाग में फैले कुव्यवस्था का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी करारा प्रहार करते हुए कहा कि झारखंड गठन के बाद इस प्रकार का निकम्मा स्वास्थ्य मंत्री नहीं देखा गया। अपना काम छोड़कर स्वास्थ्य मंत्री केवल गैर जरूरी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। पूरे स्वास्थ्य सिस्टम का कबाड़ा करके इस सरकार ने छोड़ दिया है। यह कुव्यवस्था अब जानलेवा बन चुकी है।

श्री साहू ने कहा कि हेमन्त सोरेन सरकार अबुआ सरकार होने का दंभ भरती रहती है। लेकिन इस सरकार में आदिम जनजातियों की स्थिति ही काफी गंभीर है। मृत प्रसूता भी आदिम जनजाति से ही थी। यह सर्वविदित है कि यह समुदाय आज अपने अस्तित्व को लेकर संघर्षरत है। बावजूद राज्य सरकार की इस समुदाय के प्रति यह उदासीनता शर्मनाक और चिंतनीय है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मीरा मालतो को उनके परिजनों द्वारा पहले राजाभीठा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था और वहां से प्रसूता को गोड्डा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिर वहां से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां ऑपरेशन के दौरान उनकी मौत हो जाती है।

श्री साहू ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही सरायकेला के राजनगर में मोबाइल की रोशनी में प्रसव के दौरान मां बेटे की मौत से इस सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। अगर सबक लिया होता तो इस प्रकार की तस्वीर पुनः सामने नहीं आती। दरअसल राज्य सरकार को आम लोगों की जान माल की चिकित्सीय सुरक्षा से कोई सरोकार ही नहीं है। सरकार केवल लूट खसोट में लगी हुई है। यहां पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ही ध्वस्त है। कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब स्वास्थ्य विभाग में कुव्यवस्था को लेकर अखबारों में खबरें प्रकाशित नहीं होती हो।

श्री साहू ने कहा कि पहले ही खटिया, ठेला एंबुलेंस से सिस्टम दागदार होता रहा है। यहां तो अब थैले में, कार्टून में एक छोटे बच्चे का शव पिता द्वारा ढोकर ले जाने की घटना घट चुकी है। आए दिन हो रही इस प्रकार की मौत का जिम्मेवार कौन है मुख्यमंत्री जी ? अगर आप लोगों से व्यवस्था नहीं संभलती तो राज्य के गरीब आदिवासियों और अन्य लोगों की जान लेने पर क्यों तुले हैं ? इस्तीफा क्यों नहीं दे देते ?

श्री साहू ने राज्य सरकार को चेताते हुए कहा कि भाजपा मूकदर्शक बनी नहीं रह सकती है। अगला आंदोलन राज्य में ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ही किया जाएगा।

राज्य सरकार 10000 करोड़ के मदर ऑफ ऑल स्कैम ट्रेजरी घोटाले को सुनियोजित तरीके से दफनाने में लगी- प्रतुल शाह देव

एसआईटी में उन लोगों को सदस्य बनाया गया जिन पर खुद जांच की तलवार लटकी

वित्त विभाग ने सिर्फ क्लर्क, किरानी को हटाने का आदेश दिया,बड़े मछलियों को खुला छोड़ दिया

सरकार स्पष्ट करे कि बोकारो स्ट्रांग रूम में जमा 14 किलो सोना सुरक्षित है?

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर 10000 करोड़ के ट्रेजरी स्कैम को सुनियोजित तरीके से दफनाने का आरोप लगाया।प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार ने वित्त विभाग के निर्णय के आलोक में पत्रांक (2)- 12/26, 252 के जरिए वित्तीय कार्य से जुड़े 3 वर्ष से ज्यादा एक ही पद पर जमे सिर्फ क्लर्क और किरानी के ट्रांसफर का आदेश दिया। एसपी,डीएसपी और ट्रेजरी अफसर यथावत पदों पर आज भी बने हुए हैं। असली आरोप तो इन पर ही लगा था जो आज भी जमे हुए हैं

प्रतुल ने कहा की उत्पाद सचिव के नेतृत्व में बनी एसआईटी की टीम ने 2020 से रिकॉर्ड मांगा है। 8 मई को यह टीम बोकारो जाने वाली है ।एजी की आपत्ति के बाद अब ये 2011 से रिकॉर्ड मांग रही है।इस घोटाले को दबा देने की पूरी प्लानिंग है।तभी जांच समिति में सीआईडी के वर्तमान दो आईजी को छोड़कर पुलिस के मानवाधिकार आईजी को कमान दी गई है। इसके अतिरिक्त एसआईटी टीम के जो सदस्य हैं उसमें से एक 2022 के दौरान बोकारो के भी एसपी थे और 2014-16 के दौरान हजारीबाग के डीएसपी थे ।इस दौरान दोनों जिला में भी ट्रेजरी घोटाला हुआ था। इस जांच समिति के एक और सदस्य डीआईजी स्तर के एक अधिकारी 27 नवंबर, 2017 से बोकारो एसपी थे। वह 2019 तक इस पद पर रहे।2018 में अकाउंटेंट कौशल पांडे का बोकारो तबादला हुआ। कौशल पांडे ही इस पूरे घोटाले का किंग पिन माना जाता है। उस समय अकाउंट सेक्शन की हेड क्लर्क प्रभा टोप्पो को हटाकर कौशल पांडे को प्रभार दे दिया गया।

प्रतुल ने कहा की बोकारो के स्ट्रांग रूम में लगभग 12 से 14 किलो तक सोना जमा है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह सोना अभी भी वहां मौजूद है या कोई हेरा फेरी हो गई है। प्रतुल ने कहा कि जो एसआईटी जाए ,वह स्ट्रांग रूम की भी जांच कर इस सोने का भौतिक सत्यापन करे।

प्रतुल ने कहा कि झारखंड वित्तीय नियमावली एवं ट्रेजरी कोड के नियम 305 के अनुसार डीडीओ को अपने अधीन पैसे के खर्च की उस तरह चिंता करनी चाहिए जैसा वह अपने घर के लिए खर्च कर रहे हो। प्रतुल ने कहा पर यह आश्चर्यजनक बात है कि एक माह बीत जाने के बाद भी डीडीओ और ट्रेजरी ऑफिसर अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं। एसआईटी को जांच के लिए इन्हीं अफसर से मदद लेना है।ये न सिर्फ सुबूत मिटा सकते हैं बल्कि जांच समिति को भी गुमराह कर सकते हैं।

पीएजी ने गंभीर अनियमितता पकड़ी थी

प्रतुल ने कहा इससे पहले प्रिंसिपल एजी में दो अप्रैल,2026 की रिपोर्ट में ही भौतिक सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर ट्रेजरी में गड़बड़ी के सबूत पेश किए थे। रिपोर्ट के अनुसार 58% डी ए को कई गुना ज्यादा बढ़ा कर लिया गया।रिपोर्ट में मास्टर डाटा कंट्रोल में बड़ी कमजोरी पाई गई ।इसी रिपोर्ट में 2175 मामले ऐसे आए जिनके जन्मतिथि 2023 और 2026 के बीच में बदल दी गई ।इसी कालखंड में 2890 पैन नंबर के साथ भी फेरबदल हुआ और 5037 सरकारी कर्मचारियों के जॉइनिंग डेट के साथ भी छेड़छाड़ की गई।

प्रतुल ने कहा कि सरकार का जो रवैया है उस से स्पष्ट है कि वह मदर आफ स्कैम को दबाने की कोशिश हो रही है।इसलिए राज्य सरकार को अविलंब इस पूरे मामले की ईडी और सीबीआई जांच के आदेश देने चाहिए। अगर राज्य सरकार ऐसा नहीं करती है तो भारतीय जनता पार्टी भविष्य में उचित कदम उठाएगी आज के प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी उपस्थित थे।

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