डेढ़ लाख महिलाओं का सम्मान छीना, हेमंत सरकार जवाब दे….नाम क्यों काटे गए?
चुनाव जीतने के लिए योजना बनाई, चुनाव जीतते ही महिलाओं को ठगा
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस ‘मंईयां सम्मान योजना’ को विधानसभा चुनाव 2024 से पहले महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताकर प्रचारित किया गया था, वही योजना आज ‘मंईयां अपमान योजना’ बनकर रह गई है। चुनाव खत्म होते ही सरकार ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है और अब लाखों महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
रमाकांत महतो ने कहा कि चुनाव से पहले बड़े स्तर पर प्रचार – प्रसार कर यह घोषणा की गई थी अगर झामुमो की सरकार बनी तो राज्य के 18 साल से 50 साल उम्र की महिलाओं को हर साल उनके खाते में 30 हज़ार रूपये इस योजना के तहत दिए जाएंगे। लेकिन यह घोषणा थोथी साबित हुई।सरकार बनने के बाद नानाप्रकार के बहाने बना कर 50 लाख महिलाओं की संख्या को घटाकर 35 लाख कर दिया गया। अब सरकार ने करीब डेढ़ लाख महिलाओं के नाम लाभुक सूची से हटाकर यह साबित कर दिया है कि उसका उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि चुनावी लाभ उठाना था। चुनाव के समय महिलाओं से बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सत्ता में लौटते ही उन्हीं महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया। यह महिलाओं के विश्वास के साथ खुला विश्वासघात है।
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार बताए कि आखिर डेढ़ लाख महिलाओं का कसूर क्या था? यदि वे अपात्र थीं तो चुनाव से पहले उन्हें पात्र कैसे बताया गया? और यदि वे पात्र हैं, तो उनके नाम किस आधार पर काट दिए गए? सरकार को हर हटाए गए नाम का कारण सार्वजनिक करना चाहिए।
श्री महतो ने आरोप लगाया कि बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया, पूर्व सूचना और निष्पक्ष जांच के महिलाओं के नाम हटाना प्रशासनिक मनमानी और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण है। गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं आज सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार महिलाओं को सम्मान नहीं, बल्कि अपमान और मानसिक प्रताड़ना दे रही है। जिस योजना को महिला सम्मान का प्रतीक बताया गया था, वही आज महिलाओं के लिए चिंता, असुरक्षा और अपमान का कारण बन चुकी है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि डेढ़ लाख महिलाओं की पूरी सूची तत्काल सार्वजनिक की जाए, नाम हटाने का कारण बताया जाए, सभी पात्र महिलाओं का लाभ अविलंब बहाल किया जाए तथा इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

