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बच्चा चोरी और मानव तस्करी से झारखंड का हर परिवार भयभीत,हेमंत सरकार पूरी तरह विफल : प्रतुल शाह देव

गायब हुए बच्चों और बच्चों में अधिकांश अनुसूचित जनजाति से संबंधित

6 वर्षों के बाद भी हजारों बच्चों का कोई अता पता नहीं

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड में बच्चों के अपहरण, लापता होने और मानव तस्करी की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।उन्होंने कहा कि झारखंड से हर वर्ष औसतन 500 से 700 नाबालिग बच्चे लापता हो रहे हैं। जिनमें से कई का अब तक कोई पता नहीं चल सका।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वर्ष 2022 में आंकड़ों के अनुसार टाटा से 122,गुमला से 52, लोहरदगा से 36 ,चाईबासा से 39, रांची से 29 और पलामू से 46 नाबालिगो के लापता होने की रिपोर्ट हुई। वर्ष 2024 में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 236 नाबालिग़ बच्चे ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार हुए।अभी भी हजारों बच्चे ट्रेसलेस है और पुलिस इनका पता लगाने में विफल रही है।

प्रतुल शाह देव ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में बच्चा चोर और मानव तस्करी के संगठित गिरोह निर्भीक होकर सक्रिय हैं और गरीब व आदिवासी बच्चे सबसे अधिक निशाने पर हैं।उन्होंने कहा कि आज झारखंड में माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने से डर रहे हैं। यह किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है।

प्रतुल ने राज्य सरकार से जवाब माँगा कि लापता बच्चों की खोज के लिए विशेष अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा और तस्करी के गिरोहों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए तो भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन चलाएगी।झारखंड की जनता अपने बच्चों की सुरक्षा पर समझौता नहीं करेगी।


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