देश के नामचीन योग शिक्षिका राफिया नाज के साथ राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी की भाषा चिंतनीय: बाबूलाल मरांडी

भाजपा विधायकदल के नेता एवम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड सरकार क्या चाहती है कि झारखंड से कोई दूसरी मलाला बने। श्री मरांडी आज अपने आवास से ऑनलाइन प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ योग शिक्षिका के साथ चंद मुठी भर लोगों की मानसिकता को देखते हुए यही लगता है कि सही मायने में यह मामला पाकिस्तान की शिक्षा कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई से इतर नही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस संबंध में लिखे पत्र को जारी करते हुए कहा कि योग शिक्षिका को पुरवर्ती राज्य सरकार द्वारा नवंबर 2017 में मिली सुरक्षा को अकारण हटा लेने और कुछ कथित कट्टरपंथियों द्वारा मिल रही धमकियों के कारण इनके परिवार के जान की असुरक्षा की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।
कहा कि जिस युवती पर राज्य को फक्र होना चाहिए उसके साथ हुई ज्यादती रोंगटे खड़ी करने वाली है। बात सिर्फ कट्टरपंथियों की उदंडता तक सीमित होती तो उनकी सोच और नासमझी समझ मे आती आश्चर्य नही होता, परंतु नाजिया द्वारा फ़ोन पर अपनी गुहार लगाने के बाद राज्य के सबसे बड़े ओहदे पर बैठे पुलिस अधिकारी की भाषा प्रदेश केलिये बहुत ही चिंतनीय है।

उन्होंने कहा कि राफिया ने केवल इतना कुसूर किया है कि वह योग को बढ़ावा देती है और लोगों को निरोग बनाने केलिये योग सिखलाती है। कहा कि संबंधित समुदाय के गिने चुने असामाजिक लोग इसे पचा नही पा रहे हैं।
कहा कि आज योग को विश्व ने मान्यता दी है। मुस्लिम बहुल देश सऊदी अरब में इसे खेल का दर्जा दिया गया है।
श्री मरांडी ने कहा कि राफिया ने अपने साथ हो रही ज्यादती और जुल्म को लेकर पुलिस को कई आवेदन लिखित दिये। पुरवर्ती भाजपा सरकार ने नवंबर 2017 में इन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई थी उसे वर्तमान राज्य सरकार ने मार्च 2020 में बिना कुछ बताये वापस ले ली।कहा कि इस संबंध में राफिया द्वारा विगत 16 जून 2020 को रांची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को आवेदन देकर अपनी व्यथा बताते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की। आवेदन में राफिया ने बताया है कि कैसे सुरक्षा वापस लेने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं फिर शुरू हो गई।उसने ऑनलाइन एफआईआर भी दर्ज कराए है। मानवाधिकार आयोग ने भी इसे गम्भीरता से लेते हुए रांची पुलिस से विगत 12 जुलाई को 8 सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है।महिला आयोग ने भी इसे से संज्ञान में लिया है। इस बीच प्रभारी पुलिस महानिदेशक द्वारा एक लड़की की बात को बिना पूरा सुने यह कहना कि फोन रखो,दिमाग मत खराब करो गैर जिम्मेदाराना रुख को प्रदर्शित करता है। ऐसे में फिर क्यों नहीं राज्य का कोई दुस्साहसी दरोगा महिलाओं का खुलेआम बाल खीचने और मारपीट करने की दुस्साहस करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगर राफिया को सुरक्षा देने में अक्षम है तो वह लिखित बताये ।उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की प्रति प्रधानमंत्री जी एवम गृह मंत्री जी को भी प्रेषित कर रहे हैं।
उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे द्वारा लिखित पत्र के सार्वजनिक होने के बाद राफिया और उसके परिवार पर खतरा बढ़ेगा,पुलिस और गुंडों का गठजोड़ इस युवती को चुप कराने केलिये एडी चोटी एक कर देगा। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर इसकी जिम्मेवार राज्य सरकार मानी जायेगी।
उन्होंने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि अविलंब राफिया एवम उसके परिवार की समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

*पत्रकार वार्ता को ऑनलाइन संबोधित करते हुए योग शिक्षिका राफिया ने कहा कि मैंने आज रक्षा बंधन के पवित्र दिन पर पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी को राखी बांधते हुए अपने सुरक्षा की गुहार लगाई है।

कहा कि योग भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे पूरी दुनिया स्वीकार किया है। योग का किसी पूजा उपासना से जोड़कर नही देखा जाना चाहिये।
कहा कि मै मरने से नही डरती परंतु मैं कोई चोर बदमाश नही जो कुछ चंद शिरफ़िरों से डर जाऊं।में सत्य और न्याय केलिये संघर्ष कर रही हूं।भले मुझे अपमानित होना पड़े पर मैं अंतिम सांस तक लड़ती रहूंगी।
उन्होंने पत्रकार बंधुओं को डीजीपी के बात की ऑडियो भी सुनाई।कहा प्रशासन ने मुझे सूचना देकर कही जाने का लिखित निर्देश दिया परंतु आज कोई सुनने वाला नही। उन्होंने प्रशासन के दोहरे चरित्र को भी बताया कहा कि कैमरे के सामने और बाद में बोले गए बातों में आसमान जमीन का अंतर होता है।

प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, सह प्रभारी संजय जायसवाल प्रवक्ता सरोज सिंह,सोशल मीडिया के सह संयोजक राहुल अवस्थी भी उपस्थित थे।

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