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झारखंड राज्य का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कारण ही संभव हो पाया था

सरकारी विज्ञापन में अलग राज्य के निर्माता के रूप में सिर्फ शिबू सोरेन की चर्चा करना और जयपाल सिंह मुंडा, एन ही होरो, निर्मल महतो, विनोद बिहारी महतो, रामदयाल मुंडा जैसे आंदोलनकारियों को भुला देना कतई उचित नहीं

भाजपा ने झारखंड सरकार के उस विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति की है जिसमें अलग राज्य के निर्माता के रूप में सिर्फ शिबू सोरेन को दर्शाया गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा की अलग राज्य का निर्माण स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की तत्कालीन एनडीए सरकार ने किया था।प्रतुल ने कहा कांग्रेस ने दशकों तक अलग राज्य की मांग को लटका कर रखा था।प्रतुल ने राज्य सरकार से जानना चाहा की उसने निर्माता के रूप में सिर्फ शिबू सोरेन का नाम देकर इस आंदोलन की नींव रखने वाले जयपाल सिंह मुंडा जी, विपरीत समय में आंदोलन को जिंदा रखने वाले एन ही होरो,रामदयाल मुंडा, निर्मल महतो,विनोद बिहारी महतो सहित अपने प्राणों की आहुति देने वाले हजारों आंदोलनकारियों की चर्चा न करके बहुत आपत्तिजनक कार्य किया है।प्रतुल ने कहा की अलग राज्य के आंदोलन को धारदार रूप देने वाले आजसू के क्रांतिकारी साथियों के भी योगदान को भुला दिया गया है।

प्रतुल ने कहा की भाजपा भी अलग राज्य के मुद्दे पर लंबे समय से आंदोलन से जुड़ी रही। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने मोराबादी में ही घोषणा की थी कि उनकी सरकार बनेगी तो अलग राज्य का सपना साकार होगा। वादे के मुताबिक सत्ता में आने के बाद बिहार विधानसभा के कड़े विरोध के बावजूद भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने अलग राज्य का गठन किया।पर अब ऐसा प्रतीत होता है की झामुमो की गठबंधन सरकार इतिहास को अपने लिहाज से लिखने की कोशिश कर रही है। 1992 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने समर्थन के बदले अलग राज्य देने की पेशकश की थी तो उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पैसा लेकर अलग राज्य के गठन के मुद्दे को छोड़ दिया था।राज्य सरकार ने अपने विज्ञापन में झारखंड आंदोलन से जुड़े दूसरे महापुरुषों का जिक्र न करके निंदनीय कार्य किया है।


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